सांख्य योग
वास्तविक उपदेश यहीं से। अविनाशी आत्मा, स्थिर बुद्धि, फल की कामना के बिना कर्म। 2.47 इसी अध्याय में है।
सभी 72 श्लोक नीचे।
Wisdom translation, edited by Ankur Shukla. Commentary AI-drafted, human-reviewed. Reviewed June 2026. Methodology →

“संजय बोले वैसी कायरता से आविष्ट उन अर्जुन के प्रति, जो कि विषाद कर रहे हैं और आँसुओं के कारण जिनके नेत्रों की देखने की शक्ति अवरुद्ध हो रही है, भगवान् मधुसूदन ये आगे कहे जानेवाले वचन बोले ॥”पूरा श्लोक 2.1 पढ़ें →सभी श्लोक
- 2.1अ. 2
Grief opens the door for instruction.
संजय बोले वैसी कायरता से आविष्ट उन अर्जुन के प्रति, जो कि विषाद कर रहे हैं और आँसुओं के कारण जिनके नेत्रों की देखने की …
- 2.2अ. 2
Delusion has no place in a decisive moment.
श्रीभगवान् बोले हे अर्जुन इस विषम अवसरपर तुम्हें यह कायरता कहाँसे प्राप्त हुई, जिसका कि श्रेष्ठ पुरुष सेवन नहीं करते, …
- 2.3अ. 2
Weakness is optional; the call to act remains.
हे पृथानन्दन अर्जुन इस नपुंसकताको मत प्राप्त हो क्योंकि तुम्हारेमें यह उचित नहीं है । हे परंतप हृदयकी इस तुच्छ दुर्बल…
- 2.4अ. 2
Respect can make necessary action feel unbearable.
अर्जुन बोले हे मधुसूदन मैं रणभूमिमें भीष्म और द्रोणके साथ बाणोंसे युद्ध कैसे करूँ क्योंकि हे अरिसूदन ये दोनों ही पूजाके…
- 2.5अ. 2
A victory that destroys reverence is already a loss.
महानुभाव गुरुजनोंको न मारकर इस लोकमें मैं भिक्षाका अन्न खाना भी श्रेष्ठ समझता हूँ । क्योंकि गुरुजनोंको मारकर यहाँ रक्तस…
- 2.6अ. 2
Honest uncertainty is the first crack in moral paralysis.
हम यह भी नहीं जानते कि हमलोगोंके लिये युद्ध करना और न करना इन दोनोंमेंसे कौनसा अत्यन्त श्रेष्ठ है और हमें इसका भी पता न…
- 2.7अ. 2
Clarity begins when you admit you cannot see the right action alone.
कायरतारूपदोषसे तिरस्कृत स्वभाववाला और धर्मके विषयमें मोहित अन्तःकरणवाला मैं आपसे पूछता हूँ कि जो निश्चित कल्याण करनेवाली…
- 2.8अ. 2
No outer victory can cure an inner collapse.
पृथ्वीपर धनधान्यसमृद्ध और शत्रुरहितराज्य तथा स्वर्गमें देवताओंका आधिपत्य मिल जाय तो भी इन्द्रियोंको सुखानेवाला मेरा जो श…
- 2.9अ. 2
Refusal has stopped the war inside him.
संजय बोले हे शत्रुतापन धृतराष्ट्र ऐसा कहकर निद्राको जीतनेवाले अर्जुन अन्तर्यामी भगवान् गोविन्दसे मैं युद्ध नहीं करूँगा …
- 2.10अ. 2
Guidance begins when grief is met without rejection.
हे भरतवंशोद्भव धृतराष्ट्र दोनों सेनाओंके मध्यभागमें विषाद करते हुए उस अर्जुनके प्रति हँसते हुएसे भगवान् हृषीकेश यह आगे क…
- 2.11अ. 2
Clear seeing ends grief where the wise know none is needed.
श्रीभगवान् बोले तुमने शोक न करनेयोग्यका शोक किया है और पण्डिताईकी बातें कह रहे हो परन्तु जिनके प्राण चले गये हैं, उनके …
- 2.12अ. 2
What truly exists was never born and never lost.
किसी कालमें मैं नहीं था और तू नहीं था तथा ये राजालोग नहीं थे, यह बात भी नहीं है और इसके बाद भविष्य में मैं, तू और राजलोग…
- 2.13अ. 2
What changes form is not what you truly are.
देहधारीके इस मनुष्यशरीरमें जैसे बालकपन, जवानी और वृद्धावस्था होती है, ऐसे ही देहान्तरकी प्राप्ति होती है । उस विषयमें ध…
- 2.14अ. 2
Passing sensations lose power when you stop treating them as permanent.
हे कुन्तीनन्दन इन्द्रियोंके जो विषय जड पदार्थ हैं, वो तो शीत अनुकूलता और उष्ण प्रतिकूलता के द्वारा सुख और दुःख देनेवाले…
- 2.15अ. 2
Freedom begins where pain and pleasure stop controlling you.
कारण कि हे पुरुषोंमें श्रेष्ठ अर्जुन सुखदुःखमें सम रहनेवाले जिस धीर मनुष्यको ये मात्रास्पर्श पदार्थ व्यथित सुखीदुःखी नही…
- 2.16अ. 2
What passes away was never ultimate; what is real cannot vanish.
टिप्पणी प0 55 असत् का तो भाव सत्ता विद्यमान नहीं है और सत् का अभाव विद्यमान नहीं है, तत्त्वदर्शी महापुरुषोंने इन दोनोंका…
- 2.17अ. 2
What truly pervades everything cannot be destroyed.
अविनाशी तो उसको जान, जिससे यह सम्पूर्ण संसार व्याप्त है । इस अविनाशीका विनाश कोई भी नहीं कर सकता ॥
- 2.18अ. 2
What is truly you cannot be destroyed, so duty remains.
अविनाशी, अप्रमेय और नित्य रहनेवाले इस शरीरी के ये देह अन्तवाले कहे गये हैं । इसलिये हे अर्जुन तुम युद्ध करो ॥
- 2.19अ. 2
What you are cannot be reduced to killer or victim.
जो मनुष्य इस अविनाशी शरीरीको मारनेवाला मानता है और जो मनुष्य इसको मरा मानता है, वे दोनों ही इसको नहीं जानते क्योंकि यह न…
- 2.20अ. 2
What you are cannot be touched by birth or death.
यह शरीरी न कभी जन्मता है और न मरता है तथा यह उत्पन्न होकर फिर होनेवाला नहीं है । यह जन्मरहित, नित्यनिरन्तर रहनेवाला, शा…
- 2.21अ. 2
Clear seeing makes violence look absurd.
हे पृथानन्दन जो मनुष्य इस शरीरीको अविनाशी, नित्य, जन्मरहित और अव्यय जानता है, वह कैसे किसको मारे और कैसे किसको मरवाये ॥
- 2.22अ. 2
What you are does not end when one body is left behind.
मनुष्य जैसे पुराने कपड़ोंको छोड़कर दूसरे नये कपड़े धारण कर लेता है, ऐसे ही देही पुराने शरीरोंको छोड़कर दूसरे नये शरीरोंम…
- 2.23अ. 2
Your deepest reality is beyond every physical force.
शस्त्र इस शरीरीको काट नहीं सकते, अग्नि इसको जला नहीं सकती, जल इसको गीला नहीं कर सकता और वायु इसको सुखा नहीं सकती ॥
- 2.24अ. 2
What you are cannot be harmed by anything that changes.
यह शरीरी काटा नहीं जा सकता, यह जलाया नहीं जा सकता, यह गीला नहीं किया जा सकता और यह सुखाया भी नहीं जा सकता । कारण कि यह …
- 2.25अ. 2
What is deepest in you was never available for loss.
यह देही प्रत्यक्ष नहीं दीखता, यह चिन्तनका विषय नहीं है और यह निर्विकार कहा जाता है । अतः इस देहीको ऐसा जानकर शोक नहीं क…
- 2.26अ. 2
Even the plain fact of change is no reason to drown in sorrow.
हे महाबाहो अगर तुम इस देहीको नित्य पैदा होनेवाला अथवा नित्य मरनेवाला भी मानो, तो भी तुम्हें इस प्रकार शोक नहीं करना चाह…
- 2.27अ. 2
What must change is not a reason for grief.
क्योंकि पैदा हुएकी जरूर मृत्यु होगी और मरे हुएका जरूर जन्म होगा । इस जन्ममरणरूप परिवर्तन के प्रवाह का परिहार अर्थात् नि…
- 2.28अ. 2
What appears briefly was never meant to be clung to.
हे भारत सभी प्राणी जन्मसे पहले अप्रकट थे और मरनेके बाद अप्रकट हो जायँगे, केवल बीचमें ही प्रकट दीखते हैं । अतः इसमें शो…
- 2.29अ. 2
The true self remains mysterious even after endless hearing.
कोई इस शरीरीको आश्चर्यकी तरह देखता है और वैसे ही अन्य कोई इसका आश्चर्यकी तरह वर्णन करता है तथा अन्य कोई इसको आश्चर्यकी त…
- 2.30अ. 2
What is most real in a person cannot be killed, so grief loses its ground.
हे भरतवंशोद्भव अर्जुन सबके देहमें यह देही नित्य ही अवध्य है । इसलिये सम्पूर्ण प्राणियोंके लिये अर्थात् किसी भी प्राणीके…
- 2.31अ. 2
Right action can feel hard and still be the best choice.
अपने स्वधर्म क्षात्रधर्म को देखकर भी तुम्हें विकम्पित अर्थात् कर्तव्यकर्मसे विचलित नहीं होना चाहिये क्योंकि धर्ममय युद्ध…
- 2.32अ. 2
A righteous burden can become the highest opening.
अपनेआप प्राप्त हुआ युद्ध खुला हुआ स्वर्गका दरवाजा भी है । हे पृथानन्दन वे क्षत्रिय बड़े सुखी भाग्यशाली हैं, जिनको ऐसा …
- 2.33अ. 2
Avoiding the right duty does not protect you; it stains you.
अब अगर तू यह धर्ममय युद्ध नहीं करेगा, तो अपने धर्म और कीर्तिका त्याग करके पापको प्राप्त होगा ॥
- 2.34अ. 2
A honored life can be wounded more by shame than by death.
और सब प्राणी भी तेरी सदा रहनेवाली अपकीर्तिका कथन अर्थात निंदा करेंगे । वह अपकीर्ति सम्मानित मनुष्यके लिये मृत्युसे भी ब…
- 2.35अ. 2
Retreat from duty, and respect turns to shrinkage.
महारथीलोग तुझे भयके कारण युद्धसे उपरत हटा हुआ मानेंगे । जिनकी धारणामें तू बहुमान्य हो चुका है, उनकी दृष्टिमें तू लघुताक…
- 2.36अ. 2
Public shame can hurt more than physical danger.
तेरे शत्रुलोग तेरी सार्मथ्यकी निन्दा करते हुए न कहनेयोग्य बहुतसे वचन भी कहेंगे । उससे बढ़कर और दुःखकी बात क्या होगी ॥
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- 2.37अ. 2
Act now; the result does not cancel the duty.
अगर युद्धमें तू मारा जायगा तो तुझे स्वर्गकी प्राप्ति होगी और अगर युद्धमें तू जीत जायगा तो पृथ्वीका राज्य भोगेगा । अतः ह…
- 2.38अ. 2
Equanimity frees action from the stain of panic and craving.
जयपराजय, लाभहानि और सुखदुःखको समान करके फिर युद्धमें लग जा । इस प्रकार युद्ध करनेसे तू पापको प्राप्त नहीं होगा ॥
- 2.39अ. 2
Clear understanding frees action from bondage.
हे पार्थ यह समबुद्धि तेरे लिए पहले सांख्ययोगमें कही गयी, अब तू इसको कर्मयोगके विषयमें सुन जिस समबुद्धिसे युक्त हुआ तू कर…
- 2.40अ. 2
Even a tiny start on the right path protects you from fear.
मनुष्यलोकमें इस समबुद्धिरूप धर्मके आरम्भका नाश नहीं होता, इसके अनुष्ठानका उलटा फल भी नहीं होता और इसका थोड़ासा भी अनुष्ठ…
- 2.41अ. 2
Resolute seeing unifies the mind; hesitation multiplies it.
हे कुरुनन्दन इस समबुद्धिकी प्राप्तिके विषयमें व्यवसायात्मिका बुद्धि एक ही होती है । अव्यवसायी मनुष्योंकी बुद्धियाँ अनन्…
- 2.42अ. 2
Beautiful words can hide a mind trapped by desire.
हे पृथानन्दन जो कामनाओंमें तन्मय हो रहे हैं, स्वर्गको ही श्रेष्ठ माननेवाले हैं, वेदोंमें कहे हुए सकाम कर्मोंमें प्रीति …
- 2.43अ. 2
Flowery promises can keep desire alive while pretending to guide you.
हे पृथानन्दन जो कामनाओंमें तन्मय हो रहे हैं, स्वर्गको ही श्रेष्ठ माननेवाले हैं, वेदोंमें कहे हुए सकाम कर्मोंमें प्रीति …
- 2.44अ. 2
Craving scatters the mind before wisdom can settle.
उस पुष्पित वाणीसे जिसका अन्तःकरण हर लिया गया है अर्थात् भोगोंकी तरफ खिंच गया है और जो भोग तथा ऐश्वर्यमें अत्यन्त आसक्त ह…
- 2.45अ. 2
Freedom begins when gain and loss stop defining you.
वेद तीनों गुणोंके कार्यका ही वर्णन करनेवाले हैं हे अर्जुन तू तीनों गुणोंसे रहित हो जा, निर्द्वन्द्व हो जा, निरन्तर नित्य…
- 2.46अ. 2
Complete understanding makes lesser sources unnecessary.
सब तरफसे परिपूर्ण महान् जलाशयके प्राप्त होनेपर छोटे गड्ढों में भरे जल में मनुष्यका जितना प्रयोजन रहता है अर्थात् कुछ भी …
- 2.47अ. 2
Action belongs to you; the result does not.
कर्तव्यकर्म करनेमें ही तेरा अधिकार है, फलोंमें कभी नहीं । अतः तू कर्मफलका हेतु भी मत बन और तेरी अकर्मण्यतामें भी आसक्ति…
- 2.48अ. 2
Equanimity turns action into yoga.
हे धनञ्जय तू आसक्तिका त्याग करके सिद्धिअसिद्धिमें सम होकर योगमें स्थित हुआ कर्मोंको कर क्योंकि समत्व ही योग कहा जाता है…
- 2.49अ. 2
Clear discernment is richer than reward-chasing.
बुद्धियोगसमता की अपेक्षा सकामकर्म दूरसे अत्यन्त ही निकृष्ट है । अतः हे धनञ्जय तू बुद्धि समता का आश्रय ले क्योंकि फलके …
- 2.50अ. 2
Clear action frees you from the weight of both success and failure.
बुद्धिसमता से युक्त मनुष्य यहाँ जीवित अवस्थामें ही पुण्य और पाप दोनोंका त्याग कर देता है । अतः तू योगसमता में लग जा, क्…
- 2.51अ. 2
Freedom comes when action is done without clutching its reward.
समतायुक्त मनीषी साधक कर्मजन्य फलका त्याग करके जन्मरूप बन्धनसे मुक्त होकर निर्विकार पदको प्राप्त हो जाते हैं ॥
- 2.52अ. 2
Clear seeing ends the pull of future pleasures.
जिस समय तेरी बुद्धि मोहरूपी दलदलको तर जायगी, उसी समय तू सुने हुए और सुननेमें आनेवाले भोगोंसे वैराग्यको प्राप्त हो जायगा …
- 2.53अ. 2
Yoga begins when the mind stops being pulled in every direction.
जिस कालमें शास्त्रीय मतभेदोंसे विचलित हुई तेरी बुद्धि निश्चल हो जायगी और परमात्मामें अचल हो जायगी, उस कालमें तू योगको प्…
- 2.54अ. 2
Steady wisdom must be recognizable in ordinary movement.
अर्जुन बोले हे केशव परमात्मामें स्थित स्थिर बुद्धिवाले मनुष्यके क्या लक्षण होते हैं वह स्थिर बुद्धिवाला मनुष्य कैसे बो…
- 2.55अ. 2
Steadiness begins when desire no longer defines your sense of enough.
श्रीभगवान् बोले हे पृथानन्दन जिस कालमें साधक मनोगत सम्पूर्ण कामनाओंका अच्छी तरह त्याग कर देता है और अपनेआपसे अपनेआपमें…
- 2.56अ. 2
Steadiness remains when pleasure and pain lose their grip.
दुःखोंकी प्राप्ति होनेपर जिसके मनमें उद्वेग नहीं होता और सुखोंकी प्राप्ति होनेपर जिसके मनमें स्पृहा नहीं होती तथा जो राग…
- 2.57अ. 2
Steady wisdom does not need life to feel favorable.
सब जगह आसक्तिरहित हुआ जो मनुष्य उसउस शुभअशुभको प्राप्त करके न तो अभिनन्दित होता है और न द्वेष करता है, उसकी बुद्धि प्रति…
- 2.58अ. 2
Steadiness begins when the senses stop running outward.
जिस तरह कछुआ अपने अङ्गोंको सब ओरसे समेट लेता है, ऐसे ही जिस कालमें यह कर्मयोगी इन्द्रियोंके विषयोंसे इन्द्रियोंको सब प्र…
- 2.59अ. 2
Craving ends only when a higher reality becomes more compelling.
निराहारी इन्द्रियोंको विषयोंसे हटानेवाले मनुष्यके भी विषय तो निवृत्त हो जाते हैं, पर रस निवृत्त नहीं होता । परन्तु इस स…
- 2.60अ. 2
Restraint fails without disciplined senses.
हे कुन्तीनन्दन रसबुद्धि रहनेसे यत्न करते हुए विद्वान् मनुष्यकी भी प्रमथनशील इन्द्रियाँ उसके मनको बलपूर्वक हर लेती हैं ॥
- 2.61अ. 2
Wisdom becomes steady only when the senses are no longer in charge.
कर्मयोगी साधक उन सम्पूर्ण इन्द्रियोंको वशमें करके मेरे परायण होकर बैठे क्योंकि जिसकी इन्द्रियाँ वशमें हैं, उसकी बुद्धि प…
- 2.62अ. 2
What you dwell on becomes what you cling to, then what burns you.
विषयोंका चिन्तन करनेवाले मनुष्यकी उन विषयोंमें आसक्ति पैदा हो जाती है । आसक्तिसे कामना पैदा होती है । कामनासे क्रोध पै…
- 2.63अ. 2
Anger first distorts seeing, then destroys the mind that should guide action.
विषयोंका चिन्तन करनेवाले मनुष्यकी उन विषयोंमें आसक्ति पैदा हो जाती है । आसक्तिसे कामना पैदा होती है । कामनासे क्रोध पै…
- 2.64अ. 2
Freedom comes from meeting experience without attraction or aversion.
वशीभूत अन्तःकरणवाला कर्मयोगी साधक रागद्वेषसे रहित अपने वशमें की हुई इन्द्रियोंके द्वारा विषयोंका सेवन करता हुआ अन्तःकरणक…
- 2.65अ. 2
Clear seeing ends suffering and lets understanding settle at once.
वशीभूत अन्तःकरणवाला कर्मयोगी साधक रागद्वेषसे रहित अपने वशमें की हुई इन्द्रियोंके द्वारा विषयोंका सेवन करता हुआ अन्तःकरणक…
- 2.66अ. 2
Without inner discipline, even happiness has no place to stand.
जिसके मनइन्द्रियाँ संयमित नहीं हैं, ऐसे मनुष्यकी व्यवसायात्मिका बुद्धि नहीं होती और व्यवसायात्मिका बुद्धि न होनेसे उसमें…
- 2.67अ. 2
One uncontrolled sense can carry the mind away.
अपनेअपने विषयोंमें विचरती हुई इन्द्रियोंमेंसे एक ही इन्द्रिय जिस मनको अपना अनुगामी बना लेती है, वह अकेला मन जलमें नौकाको…
- 2.68अ. 2
Steady wisdom begins when the senses stop ruling your attention.
इसलिये हे महाबाहो जिस मनुष्यकी इन्द्रियाँ इन्द्रियोंके विषयोंसे सर्वथा निगृहीत वशमें की हुई हैं, उसकी बुद्धि स्थिर है ॥
- 2.69अ. 2
What the many pursue in sleep, the wise leave behind awake.
सम्पूर्ण प्राणियों की जो रात परमात्मासे विमुखता है, उसमें संयमी मनुष्य जागता है, और जिसमें सब प्राणी जागते हैं भोग और सं…
- 2.70अ. 2
Peace belongs to the one who stays steady while desire moves.
जैसे सम्पूर्ण नदियोंका जल चारों ओरसे जलद्वारा परिपूर्ण समुद्रमें आकर मिलता है, पर समुद्र अपनी मर्यादामें अचल प्रतिष्ठित …
- 2.71अ. 2
Peace begins when wanting, owning, and self-importance fall away.
जो मनुष्य सम्पूर्ण कामनाओंका त्याग करके स्पृहारहित, ममतारहित और अहंकाररहित होकर आचरण करता है, वह शान्तिको प्राप्त होता ह…
- 2.72अ. 2
Steadiness in the supreme reality ends confusion, even at life’s edge.
हे पृथानन्दन यह ब्राह्मी स्थिति है । इसको प्राप्त होकर कभी कोई मोहित नहीं होता । इस स्थितिमें यदि अन्तकालमें भी स्थित…