पचास दोहे जो लोग सबसे ज़्यादा खोजते और भेजते हैं। किसी भी रेखांकित शब्द पर टैप करें, उसका अर्थ वहीं दिखेगा।
कबीर के सबसे मशहूर दोहे, जैसे "गुरु गोविंद दोऊ खड़े" और "बुरा जो देखन मैं चला", रामनरेश त्रिपाठी की कविता-कौमुदी (1917) में छपे मिलते हैं। यहाँ 50 दोहे हैं: हर एक का आसान हिंदी अर्थ, अंग्रेज़ी अर्थ, कठिन शब्दों के अर्थ, और यह कि दोहा किस संग्रह में मिलता है।
कबीर ने कुछ लिखा नहीं, गाया। उनके दोहे सदियों तक साधुओं और गायकों के ज़रिए फैले, और हर इलाके ने उन्हें अपनी बोली में ढाल लिया। इसलिए हम किसी दोहे को नकली नहीं कहते। हर दोहे पर लिखा है कि वह कहाँ मिलता है:
कबीर ग्रंथावली (श्यामसुंदर दास): कबीर की साखियों का सबसे पुराना छपा हुआ विद्वानों का संस्करण। कविता-कौमुदी भाग 1 (रामनरेश त्रिपाठी, 1917): सौ साल से ज़्यादा पुराना संग्रह। गायन परंपरा: वे दोहे जो इन दोनों में नहीं, पर लोक और भजन गायकी में कबीर के नाम से गाए जाते हैं।
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"गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूँ पाँय। बलिहारी गुरु आपने, जिन गोविंद दिया बताय॥" गुरु पूर्णिमा पर यह सबसे ज़्यादा भेजा जाता है। इसका मतलब है कि भगवान तक पहुँचाने वाले गुरु को पहले प्रणाम।
कबीर के दोहे किस भाषा में हैं?
कबीर की भाषा को सधुक्कड़ी कहते हैं: इसमें अवधी, ब्रज, खड़ी बोली, राजस्थानी और पंजाबी के शब्द मिले हुए हैं। इसीलिए एक ही दोहे के कई रूप मिलते हैं।
साखी और दोहा में क्या फ़र्क है?
कबीर ग्रंथावली में उनके दोहों को साखी कहा गया है, यानी साक्षी: जो खुद देखा, वही कहा। छंद के हिसाब से ये दोहे ही हैं।
क्या ये सभी दोहे सच में कबीर के हैं?
कबीर ने खुद कुछ नहीं लिखा। उनके दोहे सदियों तक गाकर आगे बढ़े और बाद में संग्रहों में लिखे गए। इसलिए हर दोहे के साथ हमने लिखा है कि वह कहाँ मिलता है: कबीर ग्रंथावली, कविता-कौमुदी (1917), या गायन परंपरा।
कबीर जयंती 2027 में कब है?
कबीर जयंती ज्येष्ठ पूर्णिमा को मनाई जाती है। 2027 में यह 18 जून को है।
गुरु पूर्णिमा 2027 पर कौन सा दोहा भेजें?
गुरु पूर्णिमा 18 जुलाई 2027 को है। "गुरु गोविंद दोऊ खड़े" और "गुरु कुम्हार सिष कुंभ है" सबसे ज़्यादा पसंद किए जाते हैं।
स्रोत और तरीका
पाठ: कविता-कौमुदी भाग 1 (1917) और कबीर ग्रंथावली विकिसोर्स और कविताकोश से, और कविताकोश का कबीर दोहावली संग्रह। साफ़ दिखने वाली टाइपिंग की गलतियाँ ठीक की गई हैं। अर्थ और शब्दार्थ Wisdom के अपने हैं।
कबीर के नाम 15 दोहों में नारी या कामिनी शब्द आता है। हमने हर एक पढ़ा। 2 दोहे जो स्त्रियों को नीचा दिखाते हैं, यहाँ नहीं हैं। "क्षमा बड़न को" वाला दोहा रहीम का है, इसलिए वह भी नहीं।
कुल 84 दोहे संग्रह में दोहराए गए या थोड़े बदले रूप में थे; हर दोहा यहाँ एक बार है।