आग जो लागी समुद्र में, धुआँ न प्रकट होय: अर्थ सहित

"आग जो लागी समुद्र में, धुआँ न प्रकट होय" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: समुद्र में लगी आग का धुआँ नहीं दिखता। उसे वही जानता है जो उसमें जल रहा है, या जिसने लगाई। यह दोहा गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह में मिलता है।

आग जो लागी समुद्र में, धुआँ न होय।सो जाने जो , जाकी होय॥

āg jo lāgī samudr meṁ, dhuāṁ na prakaṭ hoyso jāne jo jaramuā, jākī lāī hoy

समुद्र में लगी आग का धुआँ नहीं दिखता। उसे वही जानता है जो उसमें जल रहा है, या जिसने लगाई।

A fire in the sea shows no smoke. Only the one burning, or the one who lit it, knows.

गायन परंपरा से

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शब्दार्थ

प्रकट
दिखाई देना (visible)
जरमुआ
जलकर मरा (the one burnt)
लाई
लगाई (lit)

यह दोहा कहाँ मिलता है

गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। यह दोहा कबीर ग्रंथावली या कविता-कौमुदी में इस रूप में नहीं मिला, पर लोक और भजन गायकी में कबीर के नाम से गाया जाता है। स्रोत पाठ

विषय: प्रेम और भक्ति।

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लोग अक्सर पूछते हैं

"आग जो लागी समुद्र में, धुआँ न प्रकट होय" का अर्थ क्या है?

समुद्र में लगी आग का धुआँ नहीं दिखता। उसे वही जानता है जो उसमें जल रहा है, या जिसने लगाई।

यह दोहा किस संग्रह में है?

गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। कबीर के दोहे सदियों तक गाए गए, इसलिए शब्दों में थोड़ा फ़र्क मिल सकता है।

What does this doha mean in English?

A fire in the sea shows no smoke. Only the one burning, or the one who lit it, knows.

स्रोत और तरीका

पाठ: Kabir Dohavali (Kavitakosh compilation)। अर्थ और शब्दार्थ Wisdom के अपने हैं।

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