सात समंद की मसि करौं, लेखनि सब बनराइ: अर्थ सहित

"सात समंद की मसि करौं, लेखनि सब बनराइ" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: सातों समुद्र की स्याही, सारे जंगल की कलम, धरती का कागज़, फिर भी हरि के गुण न लिखे जाएं। यह दोहा कबीर ग्रंथावली (श्यामसुंदर दास) में मिलता है।

सात की करौं, सब ।धरती सब करौं, तऊ हरि गुण लिख्या न जाइ॥

sāt samaṁd kī masi karauṁ, lekhani sab banarāidharatī sab kāgad karauṁ, taū hari guṇ likhyā na jāi

सातों समुद्र की स्याही, सारे जंगल की कलम, धरती का कागज़, फिर भी हरि के गुण न लिखे जाएं।

Make ink of the seven seas, pens of every forest, paper of the earth, and God's qualities still go unwritten.

कबीर ग्रंथावली में

रेखांकित शब्द पर टैप करें, अर्थ दिखेगा

WhatsApp

शब्दार्थ

समंद
समुद्र (sea)
मसि
स्याही (ink)
लेखनि
कलम (pen)
बनराइ
जंगल (forest)
कागद
कागज़ (paper)

यह दोहा कहाँ मिलता है

कबीर ग्रंथावली (श्यामसुंदर दास)। छपे हुए संग्रह में मिलना इसे कबीर की परंपरा से जोड़ता है, क्योंकि कबीर ने खुद कुछ नहीं लिखा। स्रोत पाठ

विषय: प्रेम और भक्ति।

एक पंक्ति रोज़ अपने साथ रखें

एक हफ़्ते तक रोज़ एक पंक्ति, आपकी बात के लिए, ईमेल पर।

मेरा हफ़्ता भेजें

लोग अक्सर पूछते हैं

"सात समंद की मसि करौं, लेखनि सब बनराइ" का अर्थ क्या है?

सातों समुद्र की स्याही, सारे जंगल की कलम, धरती का कागज़, फिर भी हरि के गुण न लिखे जाएं।

यह दोहा किस संग्रह में है?

कबीर ग्रंथावली (श्यामसुंदर दास)। कबीर के दोहे सदियों तक गाए गए, इसलिए शब्दों में थोड़ा फ़र्क मिल सकता है।

What does this doha mean in English?

Make ink of the seven seas, pens of every forest, paper of the earth, and God's qualities still go unwritten.

स्रोत और तरीका

पाठ: Kabir Granthavali (Shyamsundar Das), सम्रथाई का अंग via Kavitakosh। अर्थ और शब्दार्थ Wisdom के अपने हैं।

कबीर ग्रंथावली में