धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय: अर्थ सहित

"धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: मन, धीरज रखो। माली सौ घड़े पानी डाले, फल तो मौसम आने पर ही लगेगा। यह दोहा गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह में मिलता है।

धीरे-धीरे रे , धीरे सब कुछ होय।माली सौ घड़ा, आए फल होय॥

dhīre-dhīre re manā, dhīre sab kuch hoymālī sīṁce sau ghaṛā, ṝtu āe phal hoy

मन, धीरज रखो। माली सौ घड़े पानी डाले, फल तो मौसम आने पर ही लगेगा।

Slowly, mind, everything comes slowly. Water the tree a hundred times, it fruits in its season.

गायन परंपरा से

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शब्दार्थ

मना
मन (mind)
सींचे
पानी दे (waters)
ॠतु
मौसम (season)

यह दोहा कहाँ मिलता है

गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। यह दोहा कबीर ग्रंथावली या कविता-कौमुदी में इस रूप में नहीं मिला, पर लोक और भजन गायकी में कबीर के नाम से गाया जाता है। स्रोत पाठ

विषय: समय और जीवन।

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लोग अक्सर पूछते हैं

"धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय" का अर्थ क्या है?

मन, धीरज रखो। माली सौ घड़े पानी डाले, फल तो मौसम आने पर ही लगेगा।

यह दोहा किस संग्रह में है?

गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। कबीर के दोहे सदियों तक गाए गए, इसलिए शब्दों में थोड़ा फ़र्क मिल सकता है।

What does this doha mean in English?

Slowly, mind, everything comes slowly. Water the tree a hundred times, it fruits in its season.

स्रोत और तरीका

पाठ: Kabir Dohavali (Kavitakosh compilation)। अर्थ और शब्दार्थ Wisdom के अपने हैं।

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