गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाँय: अर्थ सहित

"गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाँय" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: गुरु और भगवान दोनों सामने हों तो पहले गुरु को प्रणाम, क्योंकि उन्होंने ही भगवान तक पहुँचाया। यह दोहा कविता-कौमुदी भाग 1 (रामनरेश त्रिपाठी, 1917) में मिलता है।

गुरु दोऊ खड़े लागू । गुरु आपने जिन दिया ॥

guru goviṁd doū khaṛe kāke lāgū pāṁybalihārī guru āpane jin goviṁd diyā batāy

गुरु और भगवान दोनों सामने हों तो पहले गुरु को प्रणाम, क्योंकि उन्होंने ही भगवान तक पहुँचाया।

If guru and God both stood before me, I would bow to the guru first. He showed me God.

कविता-कौमुदी (1917) में

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शब्दार्थ

गोविंद
भगवान (God)
काके
किसके (whose)
पाँय
पैर (feet)
बलिहारी
न्योछावर (I give myself to)
बताय
दिखा दिया (showed)

यह दोहा कहाँ मिलता है

कविता-कौमुदी भाग 1 (रामनरेश त्रिपाठी, 1917)। छपे हुए संग्रह में मिलना इसे कबीर की परंपरा से जोड़ता है, क्योंकि कबीर ने खुद कुछ नहीं लिखा। स्रोत पाठ

विषय: गुरु पर दोहे।

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लोग अक्सर पूछते हैं

"गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाँय" का अर्थ क्या है?

गुरु और भगवान दोनों सामने हों तो पहले गुरु को प्रणाम, क्योंकि उन्होंने ही भगवान तक पहुँचाया।

यह दोहा किस संग्रह में है?

कविता-कौमुदी भाग 1 (रामनरेश त्रिपाठी, 1917)। कबीर के दोहे सदियों तक गाए गए, इसलिए शब्दों में थोड़ा फ़र्क मिल सकता है।

What does this doha mean in English?

If guru and God both stood before me, I would bow to the guru first. He showed me God.

स्रोत और तरीका

पाठ: Kavita-Kaumudi vol. 1 (Ramnaresh Tripathi, 1917), Kabir sakhis। अर्थ और शब्दार्थ Wisdom के अपने हैं।

कविता-कौमुदी (1917) में