गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिलै न मोष: अर्थ सहित

"गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिलै न मोष" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: गुरु बिना न ज्ञान आता है, न मुक्ति मिलती है, न सच दिखता है, न दोष मिटते हैं। यह दोहा गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह में मिलता है।

गुरु बिन ज्ञान न , गुरु बिन मिलै न ।गुरु बिन न सत्य को, गुरु बिन मिटे न दोष॥

guru bin jñān na upajai, guru bin milai na moṣguru bin lakhai na saty ko, guru bin miṭe na doṣ

गुरु बिना न ज्ञान आता है, न मुक्ति मिलती है, न सच दिखता है, न दोष मिटते हैं।

Without a guru no knowledge, no freedom. Without a guru you do not see truth or lose your faults.

गायन परंपरा से

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शब्दार्थ

उपजै
पैदा हो (arises)
मोष
मोक्ष (liberation)
लखै
देखे (sees)

यह दोहा कहाँ मिलता है

गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। यह दोहा कबीर ग्रंथावली या कविता-कौमुदी में इस रूप में नहीं मिला, पर लोक और भजन गायकी में कबीर के नाम से गाया जाता है। स्रोत पाठ

विषय: गुरु पर दोहे।

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लोग अक्सर पूछते हैं

"गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिलै न मोष" का अर्थ क्या है?

गुरु बिना न ज्ञान आता है, न मुक्ति मिलती है, न सच दिखता है, न दोष मिटते हैं।

यह दोहा किस संग्रह में है?

गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। कबीर के दोहे सदियों तक गाए गए, इसलिए शब्दों में थोड़ा फ़र्क मिल सकता है।

What does this doha mean in English?

Without a guru no knowledge, no freedom. Without a guru you do not see truth or lose your faults.

स्रोत और तरीका

पाठ: Kabir Dohavali (Kavitakosh compilation)। अर्थ और शब्दार्थ Wisdom के अपने हैं।

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