"जो तोकूं काँटा बुवै, ताहि बोय तू फूल" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: जो तुम्हारे लिए काँटे बोए, तुम उसके लिए फूल बोओ। तुम्हें फूल मिलेंगे, उसे काँटे। यह दोहा कविता-कौमुदी भाग 1 (रामनरेश त्रिपाठी, 1917) में मिलता है।
जोकाँटा,ताहिबोयतूफूल।तोकूफूलकेफूलहै,बाँकूहै॥
jo tokūṁ kāṁṭā buvai, tāhi boy tū phūltokū phūl ke phūl hai, bāṁkū hai tiraśūl
जो तुम्हारे लिए काँटे बोए, तुम उसके लिए फूल बोओ। तुम्हें फूल मिलेंगे, उसे काँटे।
If someone sows thorns for you, sow flowers for them. You reap flowers, they reap the thorns.