पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय: अर्थ सहित

"पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: किताबें पढ़-पढ़कर दुनिया थक गई, कोई ज्ञानी न बना। प्रेम के ढाई अक्षर पढ़ ले, वही ज्ञानी है। यह दोहा कविता-कौमुदी भाग 1 (रामनरेश त्रिपाठी, 1917) में मिलता है।

पढ़-पढ़ जग , भया न कोय।ढाई प्रेम का, पढ़ै सो होय॥

pothī paṛh-paṛh jag muā, paṁḍit bhayā na koyḍhāī ākhar prem kā, paṛhai so paṁḍit hoy

किताबें पढ़-पढ़कर दुनिया थक गई, कोई ज्ञानी न बना। प्रेम के ढाई अक्षर पढ़ ले, वही ज्ञानी है।

The world died reading books and no one became wise. Learn the two and a half letters of love.

कविता-कौमुदी (1917) में

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शब्दार्थ

पोथी
किताब, ग्रंथ (scripture, book)
मुआ
मर गया (died)
पंडित
ज्ञानी (learned one)
आखर
अक्षर (letters)

यह दोहा कहाँ मिलता है

कविता-कौमुदी भाग 1 (रामनरेश त्रिपाठी, 1917)। छपे हुए संग्रह में मिलना इसे कबीर की परंपरा से जोड़ता है, क्योंकि कबीर ने खुद कुछ नहीं लिखा। स्रोत पाठ

विषय: प्रेम और भक्ति।

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लोग अक्सर पूछते हैं

"पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय" का अर्थ क्या है?

किताबें पढ़-पढ़कर दुनिया थक गई, कोई ज्ञानी न बना। प्रेम के ढाई अक्षर पढ़ ले, वही ज्ञानी है।

यह दोहा किस संग्रह में है?

कविता-कौमुदी भाग 1 (रामनरेश त्रिपाठी, 1917)। कबीर के दोहे सदियों तक गाए गए, इसलिए शब्दों में थोड़ा फ़र्क मिल सकता है।

What does this doha mean in English?

The world died reading books and no one became wise. Learn the two and a half letters of love.

स्रोत और तरीका

पाठ: Kabir Dohavali (Kavitakosh compilation)। टाइपिंग की गलती ठीक की गई: ढ़ाई से ढाई, पंड़ित से पंडित। अर्थ और शब्दार्थ Wisdom के अपने हैं।

कविता-कौमुदी (1917) में