पाहन पूजे हरि मिलें, तो मैं पूजौं पहार: अर्थ सहित

"पाहन पूजे हरि मिलें, तो मैं पूजौं पहार" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: पत्थर पूजने से भगवान मिलें तो मैं पहाड़ पूजूँ। उससे तो चक्की भली, जिसका पिसा दुनिया खाती है। यह दोहा कविता-कौमुदी भाग 1 (रामनरेश त्रिपाठी, 1917) में मिलता है।

पूजे हरि मिलें, तो मैं पूजौं । ये चक्की भली, पीस खाय संसार॥

pāhan pūje hari mileṁ, to maiṁ pūjauṁ pahāryāte ye cakkī bhalī, pīs khāy saṁsār

पत्थर पूजने से भगवान मिलें तो मैं पहाड़ पूजूँ। उससे तो चक्की भली, जिसका पिसा दुनिया खाती है।

If worshipping a stone found God, I would worship a mountain. Better the grinding stone that feeds the world.

कविता-कौमुदी (1917) में

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शब्दार्थ

पाहन
पत्थर (stone)
पहार
पहाड़ (mountain)
याते
इससे तो (rather than this)

यह दोहा कहाँ मिलता है

कविता-कौमुदी भाग 1 (रामनरेश त्रिपाठी, 1917)। छपे हुए संग्रह में मिलना इसे कबीर की परंपरा से जोड़ता है, क्योंकि कबीर ने खुद कुछ नहीं लिखा। स्रोत पाठ

विषय: सच और दिखावा।

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लोग अक्सर पूछते हैं

"पाहन पूजे हरि मिलें, तो मैं पूजौं पहार" का अर्थ क्या है?

पत्थर पूजने से भगवान मिलें तो मैं पहाड़ पूजूँ। उससे तो चक्की भली, जिसका पिसा दुनिया खाती है।

यह दोहा किस संग्रह में है?

कविता-कौमुदी भाग 1 (रामनरेश त्रिपाठी, 1917)। कबीर के दोहे सदियों तक गाए गए, इसलिए शब्दों में थोड़ा फ़र्क मिल सकता है।

What does this doha mean in English?

If worshipping a stone found God, I would worship a mountain. Better the grinding stone that feeds the world.

स्रोत और तरीका

पाठ: Kabir Dohavali (Kavitakosh compilation)। अर्थ और शब्दार्थ Wisdom के अपने हैं।

कविता-कौमुदी (1917) में