"चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोय" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: चलती चक्की देखकर कबीर रो पड़े। दो पाटों के बीच आकर कोई दाना साबुत नहीं बचता। यह दोहा गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह में मिलता है।
गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। यह दोहा कबीर ग्रंथावली या कविता-कौमुदी में इस रूप में नहीं मिला, पर लोक और भजन गायकी में कबीर के नाम से गाया जाता है। स्रोत पाठ
विषय: समय और जीवन।
एक पंक्ति रोज़ अपने साथ रखें
एक हफ़्ते तक रोज़ एक पंक्ति, आपकी बात के लिए, ईमेल पर।