चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोय: अर्थ सहित

"चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोय" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: चलती चक्की देखकर कबीर रो पड़े। दो पाटों के बीच आकर कोई दाना साबुत नहीं बचता। यह दोहा गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह में मिलता है।

चलती देख के, दिया कबीरा रोय।दुइ भीतर आइके, बचा न कोय॥

calatī cakkī dekh ke, diyā kabīrā roydui paṭ bhītar āike, sābit bacā na koy

चलती चक्की देखकर कबीर रो पड़े। दो पाटों के बीच आकर कोई दाना साबुत नहीं बचता।

Kabir wept at the turning millstones. Between the two stones, no grain comes out whole.

गायन परंपरा से

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शब्दार्थ

चक्की
आटा पीसने की चक्की (grinding mill)
पट
पाट, पत्थर (millstone)
साबित
साबुत, पूरा (whole)

यह दोहा कहाँ मिलता है

गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। यह दोहा कबीर ग्रंथावली या कविता-कौमुदी में इस रूप में नहीं मिला, पर लोक और भजन गायकी में कबीर के नाम से गाया जाता है। स्रोत पाठ

विषय: समय और जीवन।

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लोग अक्सर पूछते हैं

"चलती चक्की देख के, दिया कबीरा रोय" का अर्थ क्या है?

चलती चक्की देखकर कबीर रो पड़े। दो पाटों के बीच आकर कोई दाना साबुत नहीं बचता।

यह दोहा किस संग्रह में है?

गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। कबीर के दोहे सदियों तक गाए गए, इसलिए शब्दों में थोड़ा फ़र्क मिल सकता है।

What does this doha mean in English?

Kabir wept at the turning millstones. Between the two stones, no grain comes out whole.

स्रोत और तरीका

पाठ: Kabir Dohavali (Kavitakosh compilation)। अर्थ और शब्दार्थ Wisdom के अपने हैं।

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