जहाँ दया तह धर्म है जहाँ लोभ तह पाप: अर्थ सहित

"जहाँ दया तह धर्म है जहाँ लोभ तह पाप" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: जहाँ दया है वहाँ धर्म, जहाँ लालच वहाँ पाप। जहाँ गुस्सा वहाँ नाश, जहाँ माफ़ी वहाँ भगवान। यह दोहा कविता-कौमुदी भाग 1 (रामनरेश त्रिपाठी, 1917) में मिलता है।

जहाँ दया धर्म है जहाँ पाप।जहाँ क्रोध है जहाँ तहाँ ॥

jahāṁ dayā tah dharm hai jahāṁ lobh tah pāpjahāṁ krodh tah kāl hai jahāṁ chimā tahāṁ āp

जहाँ दया है वहाँ धर्म, जहाँ लालच वहाँ पाप। जहाँ गुस्सा वहाँ नाश, जहाँ माफ़ी वहाँ भगवान।

Where there is kindness there is dharma, where greed, sin. Anger brings ruin. Where there is forgiveness, God is there.

कविता-कौमुदी (1917) में

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शब्दार्थ

तह
वहाँ (there)
लोभ
लालच (greed)
काल
मौत, नाश (death, ruin)
छिमा
क्षमा, माफ़ी (forgiveness)
आप
स्वयं भगवान (God himself)

यह दोहा कहाँ मिलता है

कविता-कौमुदी भाग 1 (रामनरेश त्रिपाठी, 1917)। छपे हुए संग्रह में मिलना इसे कबीर की परंपरा से जोड़ता है, क्योंकि कबीर ने खुद कुछ नहीं लिखा। स्रोत पाठ

विषय: बोली और व्यवहार।

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लोग अक्सर पूछते हैं

"जहाँ दया तह धर्म है जहाँ लोभ तह पाप" का अर्थ क्या है?

जहाँ दया है वहाँ धर्म, जहाँ लालच वहाँ पाप। जहाँ गुस्सा वहाँ नाश, जहाँ माफ़ी वहाँ भगवान।

यह दोहा किस संग्रह में है?

कविता-कौमुदी भाग 1 (रामनरेश त्रिपाठी, 1917)। कबीर के दोहे सदियों तक गाए गए, इसलिए शब्दों में थोड़ा फ़र्क मिल सकता है।

What does this doha mean in English?

Where there is kindness there is dharma, where greed, sin. Anger brings ruin. Where there is forgiveness, God is there.

स्रोत और तरीका

पाठ: Kavita-Kaumudi vol. 1 (Ramnaresh Tripathi, 1917), Kabir sakhis। अर्थ और शब्दार्थ Wisdom के अपने हैं।

कविता-कौमुदी (1917) में