"कबीर जो दिन आज है, सो दिन नहीं काल" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: जो दिन आज है वह कल नहीं रहेगा। संभल सको तो संभल जाओ, मौत ताक में बैठी है। यह दोहा गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह में मिलता है।
कबीरजोदिनआजहै,सोदिननहीं।सकैतोचेतले,परीहैख्याल॥
kabīr jo din āj hai, so din nahīṁ kālceti sakai to cet le, mīc parī hai khyāl
जो दिन आज है वह कल नहीं रहेगा। संभल सको तो संभल जाओ, मौत ताक में बैठी है।
Today will not be here tomorrow. Wake up while you can, death keeps watch.
गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। यह दोहा कबीर ग्रंथावली या कविता-कौमुदी में इस रूप में नहीं मिला, पर लोक और भजन गायकी में कबीर के नाम से गाया जाता है। स्रोत पाठ
विषय: समय और जीवन।
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