कबीर जो दिन आज है, सो दिन नहीं काल: अर्थ सहित

"कबीर जो दिन आज है, सो दिन नहीं काल" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: जो दिन आज है वह कल नहीं रहेगा। संभल सको तो संभल जाओ, मौत ताक में बैठी है। यह दोहा गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह में मिलता है।

कबीर जो दिन आज है, सो दिन नहीं । सकै तो चेत ले, परी है ख्याल॥

kabīr jo din āj hai, so din nahīṁ kālceti sakai to cet le, mīc parī hai khyāl

जो दिन आज है वह कल नहीं रहेगा। संभल सको तो संभल जाओ, मौत ताक में बैठी है।

Today will not be here tomorrow. Wake up while you can, death keeps watch.

गायन परंपरा से

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शब्दार्थ

काल
आने वाला कल (tomorrow)
चेति
सचेत होकर (waking up)
मीच
मौत (death)

यह दोहा कहाँ मिलता है

गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। यह दोहा कबीर ग्रंथावली या कविता-कौमुदी में इस रूप में नहीं मिला, पर लोक और भजन गायकी में कबीर के नाम से गाया जाता है। स्रोत पाठ

विषय: समय और जीवन।

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लोग अक्सर पूछते हैं

"कबीर जो दिन आज है, सो दिन नहीं काल" का अर्थ क्या है?

जो दिन आज है वह कल नहीं रहेगा। संभल सको तो संभल जाओ, मौत ताक में बैठी है।

यह दोहा किस संग्रह में है?

गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। कबीर के दोहे सदियों तक गाए गए, इसलिए शब्दों में थोड़ा फ़र्क मिल सकता है।

What does this doha mean in English?

Today will not be here tomorrow. Wake up while you can, death keeps watch.

स्रोत और तरीका

पाठ: Kabir Dohavali (Kavitakosh compilation)। अर्थ और शब्दार्थ Wisdom के अपने हैं।

गायन परंपरा से