"काल करे सो आज कर, आज करे सो अब" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: कल का काम आज करो, आज का अभी। पल भर में सब खत्म हो सकता है, फिर कब करोगे। यह दोहा कविता-कौमुदी भाग 1 (रामनरेश त्रिपाठी, 1917) में मिलता है।
करेसोआजकर,आजकरेसोअब।पलमेंहोएगी,करेगाकब॥
kāl kare so āj kar, āj kare so abpal meṁ pralay hoegī, bahuri karegā kab
कल का काम आज करो, आज का अभी। पल भर में सब खत्म हो सकता है, फिर कब करोगे।
Do tomorrow's work today and today's work now. The end can come in a moment.