माँगन मरण समान है, मति माँगो कोई भीख: अर्थ सहित

"माँगन मरण समान है, मति माँगो कोई भीख" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: माँगना मरने जैसा है, किसी से भीख मत माँगो। माँगने से मरना अच्छा, यही गुरु की सीख है। यह दोहा गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह में मिलता है।

समान है, माँगो कोई भीख। से तो मरना भला, यह सतगुरु की ॥

māṁgan maraṇ samān hai, mati māṁgo koī bhīkhmāṁgan se to maranā bhalā, yah sataguru kī sīkh

माँगना मरने जैसा है, किसी से भीख मत माँगो। माँगने से मरना अच्छा, यही गुरु की सीख है।

Begging is like dying, so ask no one for alms. Better to die than to beg, the guru teaches.

गायन परंपरा से

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शब्दार्थ

माँगन
माँगना (begging)
मरण
मौत (death)
मति
मत (do not)
सीख
शिक्षा (teaching)

यह दोहा कहाँ मिलता है

गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। यह दोहा कबीर ग्रंथावली या कविता-कौमुदी में इस रूप में नहीं मिला, पर लोक और भजन गायकी में कबीर के नाम से गाया जाता है। स्रोत पाठ

विषय: सच और दिखावा।

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लोग अक्सर पूछते हैं

"माँगन मरण समान है, मति माँगो कोई भीख" का अर्थ क्या है?

माँगना मरने जैसा है, किसी से भीख मत माँगो। माँगने से मरना अच्छा, यही गुरु की सीख है।

यह दोहा किस संग्रह में है?

गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। कबीर के दोहे सदियों तक गाए गए, इसलिए शब्दों में थोड़ा फ़र्क मिल सकता है।

What does this doha mean in English?

Begging is like dying, so ask no one for alms. Better to die than to beg, the guru teaches.

स्रोत और तरीका

पाठ: Kabir Dohavali (Kavitakosh compilation)। अर्थ और शब्दार्थ Wisdom के अपने हैं।

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