"सबते लघुताई भली, लघुता ते सब होय" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: सबसे भली है विनम्रता, छोटेपन से सब होता है। दूज के चाँद को सब सिर झुकाते हैं। यह दोहा गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह में मिलता है।
सबतेभली,लघुतातेसबहोय।जैसेकाचन्द्रमा,शीशसबकोय॥
sabate laghutāī bhalī, laghutā te sab hoyjaise dūj kā candramā, śīś nave sab koy
सबसे भली है विनम्रता, छोटेपन से सब होता है। दूज के चाँद को सब सिर झुकाते हैं।
Humility is best, everything comes from it. Everyone bows to the slender second-day moon.
अमावस के बाद का दूसरा दिन (second day of the moon)
नवे
झुकाए (bows)
यह दोहा कहाँ मिलता है
गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। यह दोहा कबीर ग्रंथावली या कविता-कौमुदी में इस रूप में नहीं मिला, पर लोक और भजन गायकी में कबीर के नाम से गाया जाता है। स्रोत पाठ
विषय: बोली और व्यवहार।
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