"शीलवन्त सबसे बड़ा, सब रतनन की खान" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: अच्छे स्वभाव वाला सबसे बड़ा है, वह सारे रत्नों की खान है। तीनों लोकों की दौलत शील में है। यह दोहा गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह में मिलता है।
सबसेबड़ा,सबकीखान।तीनलोककी,रहीशीलमेंआन॥
śīlavant sabase baṛā, sab ratanan kī khāntīn lok kī sampadā, rahī śīl meṁ ān
अच्छे स्वभाव वाला सबसे बड़ा है, वह सारे रत्नों की खान है। तीनों लोकों की दौलत शील में है।
The person of good character is greatest, a mine of every jewel. The wealth of three worlds lies in it.
गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। यह दोहा कबीर ग्रंथावली या कविता-कौमुदी में इस रूप में नहीं मिला, पर लोक और भजन गायकी में कबीर के नाम से गाया जाता है। स्रोत पाठ
विषय: बोली और व्यवहार।
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