दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार: अर्थ सहित

"दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: मनुष्य जन्म मुश्किल से मिलता है, बार-बार नहीं। जैसे झड़ा पत्ता फिर डाल पर नहीं लगता। यह दोहा गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह में मिलता है।

मानुष जन्म है, देह न बारम्बार। ज्यों पत्ती झड़े, बहुरि न लागे ॥

durlabh mānuṣ janm hai, deh na bārambārtaruvar jyoṁ pattī jhaṛe, bahuri na lāge ḍār

मनुष्य जन्म मुश्किल से मिलता है, बार-बार नहीं। जैसे झड़ा पत्ता फिर डाल पर नहीं लगता।

A human birth is rare and does not come again, as a fallen leaf never returns to the branch.

गायन परंपरा से

रेखांकित शब्द पर टैप करें, अर्थ दिखेगा

WhatsApp

शब्दार्थ

दुर्लभ
मुश्किल से मिलने वाला (rare)
तरुवर
पेड़ (tree)
डार
डाल (branch)

यह दोहा कहाँ मिलता है

गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। यह दोहा कबीर ग्रंथावली या कविता-कौमुदी में इस रूप में नहीं मिला, पर लोक और भजन गायकी में कबीर के नाम से गाया जाता है। स्रोत पाठ

विषय: समय और जीवन।

एक पंक्ति रोज़ अपने साथ रखें

एक हफ़्ते तक रोज़ एक पंक्ति, आपकी बात के लिए, ईमेल पर।

मेरा हफ़्ता भेजें

लोग अक्सर पूछते हैं

"दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार" का अर्थ क्या है?

मनुष्य जन्म मुश्किल से मिलता है, बार-बार नहीं। जैसे झड़ा पत्ता फिर डाल पर नहीं लगता।

यह दोहा किस संग्रह में है?

गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। कबीर के दोहे सदियों तक गाए गए, इसलिए शब्दों में थोड़ा फ़र्क मिल सकता है।

What does this doha mean in English?

A human birth is rare and does not come again, as a fallen leaf never returns to the branch.

स्रोत और तरीका

पाठ: Kabir Dohavali (Kavitakosh compilation)। अर्थ और शब्दार्थ Wisdom के अपने हैं।

गायन परंपरा से