ऐसी बानी बोलिये मन का आपा खोय: अर्थ सहित

"ऐसी बानी बोलिये मन का आपा खोय" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: ऐसी बात बोलो जिसमें अहंकार न हो। वह सुनने वाले को ठंडक दे और तुम्हें भी। यह दोहा कविता-कौमुदी भाग 1 (रामनरेश त्रिपाठी, 1917) में मिलता है।

ऐसी बोलिये मन का खोय। को करै आपहुँ होय॥

aisī bānī boliye man kā āpā khoyauran ko sītal karai āpahuṁ sītal hoy

ऐसी बात बोलो जिसमें अहंकार न हो। वह सुनने वाले को ठंडक दे और तुम्हें भी।

Speak words that drop your ego. They cool the one who hears them, and cool you too.

कविता-कौमुदी (1917) में

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शब्दार्थ

बानी
वाणी, बोली (speech)
आपा
अहंकार (ego)
औरन
दूसरों (others)
सीतल
ठंडा, शांत (cool, calm)

यह दोहा कहाँ मिलता है

कविता-कौमुदी भाग 1 (रामनरेश त्रिपाठी, 1917)। छपे हुए संग्रह में मिलना इसे कबीर की परंपरा से जोड़ता है, क्योंकि कबीर ने खुद कुछ नहीं लिखा। स्रोत पाठ

विषय: बोली और व्यवहार।

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लोग अक्सर पूछते हैं

"ऐसी बानी बोलिये मन का आपा खोय" का अर्थ क्या है?

ऐसी बात बोलो जिसमें अहंकार न हो। वह सुनने वाले को ठंडक दे और तुम्हें भी।

यह दोहा किस संग्रह में है?

कविता-कौमुदी भाग 1 (रामनरेश त्रिपाठी, 1917)। कबीर के दोहे सदियों तक गाए गए, इसलिए शब्दों में थोड़ा फ़र्क मिल सकता है।

What does this doha mean in English?

Speak words that drop your ego. They cool the one who hears them, and cool you too.

स्रोत और तरीका

पाठ: Kavita-Kaumudi vol. 1 (Ramnaresh Tripathi, 1917), Kabir sakhis। अर्थ और शब्दार्थ Wisdom के अपने हैं।

कविता-कौमुदी (1917) में