"कबीर यह संसार है, जैसा सेमल फूल" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: यह दुनिया सेमल के फूल जैसी है, सुंदर पर खोखली। दस दिन के झूठे रंग में मत भूलो। यह दोहा गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह में मिलता है।
कबीरयहसंसारहै,जैसाफूल।दिनदसकेमें,झूठेरंगनभूल॥
kabīr yah saṁsār hai, jaisā semal phūldin das ke vyavahār meṁ, jhūṭhe raṁg na bhūl
यह दुनिया सेमल के फूल जैसी है, सुंदर पर खोखली। दस दिन के झूठे रंग में मत भूलो।
This world is a silk cotton flower, bright and empty. Do not lose yourself in ten days of false colour.
गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। यह दोहा कबीर ग्रंथावली या कविता-कौमुदी में इस रूप में नहीं मिला, पर लोक और भजन गायकी में कबीर के नाम से गाया जाता है। स्रोत पाठ
विषय: समय और जीवन।
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