कबीर यह संसार है, जैसा सेमल फूल: अर्थ सहित

"कबीर यह संसार है, जैसा सेमल फूल" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: यह दुनिया सेमल के फूल जैसी है, सुंदर पर खोखली। दस दिन के झूठे रंग में मत भूलो। यह दोहा गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह में मिलता है।

कबीर यह संसार है, जैसा फूल।दिन दस के में, झूठे रंग न भूल॥

kabīr yah saṁsār hai, jaisā semal phūldin das ke vyavahār meṁ, jhūṭhe raṁg na bhūl

यह दुनिया सेमल के फूल जैसी है, सुंदर पर खोखली। दस दिन के झूठे रंग में मत भूलो।

This world is a silk cotton flower, bright and empty. Do not lose yourself in ten days of false colour.

गायन परंपरा से

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शब्दार्थ

सेमल
रूई वाला लाल फूल (silk cotton flower)
व्यवहार
लेन-देन (dealings)

यह दोहा कहाँ मिलता है

गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। यह दोहा कबीर ग्रंथावली या कविता-कौमुदी में इस रूप में नहीं मिला, पर लोक और भजन गायकी में कबीर के नाम से गाया जाता है। स्रोत पाठ

विषय: समय और जीवन।

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लोग अक्सर पूछते हैं

"कबीर यह संसार है, जैसा सेमल फूल" का अर्थ क्या है?

यह दुनिया सेमल के फूल जैसी है, सुंदर पर खोखली। दस दिन के झूठे रंग में मत भूलो।

यह दोहा किस संग्रह में है?

गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। कबीर के दोहे सदियों तक गाए गए, इसलिए शब्दों में थोड़ा फ़र्क मिल सकता है।

What does this doha mean in English?

This world is a silk cotton flower, bright and empty. Do not lose yourself in ten days of false colour.

स्रोत और तरीका

पाठ: Kabir Dohavali (Kavitakosh compilation)। अर्थ और शब्दार्थ Wisdom के अपने हैं।

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