ज्यों तिल मांही तेल है, ज्यों चकमक में आग: अर्थ सहित

"ज्यों तिल मांही तेल है, ज्यों चकमक में आग" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: जैसे तिल में तेल और चकमक में आग, वैसे ही भगवान तुझमें है। जाग सके तो जाग। यह दोहा गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह में मिलता है।

ज्यों तेल है, ज्यों में आग।तेरा सांई तुझमें, बस जाग सके तो जाग॥

jyoṁ til māṁhī tel hai, jyoṁ cakamak meṁ āgterā sāṁī tujhameṁ, bas jāg sake to jāg

जैसे तिल में तेल और चकमक में आग, वैसे ही भगवान तुझमें है। जाग सके तो जाग।

Like oil in sesame and fire in flint, your Lord is in you. Wake up if you can.

गायन परंपरा से

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शब्दार्थ

तिल
तिल का बीज (sesame seed)
मांही
में (inside)
चकमक
आग वाला पत्थर (flint)

यह दोहा कहाँ मिलता है

गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। यह दोहा कबीर ग्रंथावली या कविता-कौमुदी में इस रूप में नहीं मिला, पर लोक और भजन गायकी में कबीर के नाम से गाया जाता है। स्रोत पाठ

विषय: प्रेम और भक्ति।

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लोग अक्सर पूछते हैं

"ज्यों तिल मांही तेल है, ज्यों चकमक में आग" का अर्थ क्या है?

जैसे तिल में तेल और चकमक में आग, वैसे ही भगवान तुझमें है। जाग सके तो जाग।

यह दोहा किस संग्रह में है?

गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। कबीर के दोहे सदियों तक गाए गए, इसलिए शब्दों में थोड़ा फ़र्क मिल सकता है।

What does this doha mean in English?

Like oil in sesame and fire in flint, your Lord is in you. Wake up if you can.

स्रोत और तरीका

पाठ: Kabir Dohavali (Kavitakosh compilation)। अर्थ और शब्दार्थ Wisdom के अपने हैं।

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