ज्यों तिल मांही तेल है, ज्यों चकमक में आग: अर्थ सहित
"ज्यों तिल मांही तेल है, ज्यों चकमक में आग" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: जैसे तिल में तेल और चकमक में आग, वैसे ही भगवान तुझमें है। जाग सके तो जाग। यह दोहा गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह में मिलता है।
गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। यह दोहा कबीर ग्रंथावली या कविता-कौमुदी में इस रूप में नहीं मिला, पर लोक और भजन गायकी में कबीर के नाम से गाया जाता है। स्रोत पाठ
विषय: प्रेम और भक्ति।
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