जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं: अर्थ सहित

"जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: जब तक "मैं" था, हरि नहीं थे। अब हरि हैं, "मैं" नहीं। भीतर दीपक देखा तो सारा अंधेरा मिट गया। यह दोहा कबीर ग्रंथावली (श्यामसुंदर दास) में मिलता है।

जब मैं था तब नहीं, अब हैं मैं नाहिं।सब मिटि गया, जब दीपक देख्या ॥

jab maiṁ thā tab hari nahīṁ, ab hari haiṁ maiṁ nāhiṁsab aṁdhiyārā miṭi gayā, jab dīpak dekhyā māhiṁ

जब तक "मैं" था, हरि नहीं थे। अब हरि हैं, "मैं" नहीं। भीतर दीपक देखा तो सारा अंधेरा मिट गया।

While I was there, God was not. Now God is and I am gone; the lamp within ended the dark.

कबीर ग्रंथावली में

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शब्दार्थ

हरि
भगवान (God)
अंधियारा
अंधेरा (darkness)
माहिं
भीतर (within)

यह दोहा कहाँ मिलता है

कबीर ग्रंथावली (श्यामसुंदर दास)। छपे हुए संग्रह में मिलना इसे कबीर की परंपरा से जोड़ता है, क्योंकि कबीर ने खुद कुछ नहीं लिखा। स्रोत पाठ

विषय: प्रेम और भक्ति।

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लोग अक्सर पूछते हैं

"जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं" का अर्थ क्या है?

जब तक "मैं" था, हरि नहीं थे। अब हरि हैं, "मैं" नहीं। भीतर दीपक देखा तो सारा अंधेरा मिट गया।

यह दोहा किस संग्रह में है?

कबीर ग्रंथावली (श्यामसुंदर दास)। कबीर के दोहे सदियों तक गाए गए, इसलिए शब्दों में थोड़ा फ़र्क मिल सकता है।

What does this doha mean in English?

While I was there, God was not. Now God is and I am gone; the lamp within ended the dark.

स्रोत और तरीका

पाठ: Kabir Granthavali (Shyamsundar Das), विरह का अंग via Kavitakosh। अर्थ और शब्दार्थ Wisdom के अपने हैं।

कबीर ग्रंथावली में