"लूट सके तो लूट ले, राम नाम की लूट" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: राम नाम खुला बँट रहा है, जितना ले सको ले लो। प्राण छूटने पर पछताओगे। यह दोहा गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह में मिलता है।
सकेतोले,रामनामकी।फिरेपछताओगे,जाहिंजबछूट॥
lūṭ sake to lūṭ le, rām nām kī lūṭpāche phire pachatāoge, prāṇ jāhiṁ jab chūṭ
राम नाम खुला बँट रहा है, जितना ले सको ले लो। प्राण छूटने पर पछताओगे।
Ram's name is free for the taking, take all you can. You will regret it when life slips away.
गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। यह दोहा कबीर ग्रंथावली या कविता-कौमुदी में इस रूप में नहीं मिला, पर लोक और भजन गायकी में कबीर के नाम से गाया जाता है। स्रोत पाठ
विषय: प्रेम और भक्ति।
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