लूट सके तो लूट ले, राम नाम की लूट: अर्थ सहित

"लूट सके तो लूट ले, राम नाम की लूट" कबीर का दोहा है। इसका अर्थ है: राम नाम खुला बँट रहा है, जितना ले सको ले लो। प्राण छूटने पर पछताओगे। यह दोहा गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह में मिलता है।

सके तो ले, राम नाम की । फिरे पछताओगे, जाहिं जब छूट॥

lūṭ sake to lūṭ le, rām nām kī lūṭpāche phire pachatāoge, prāṇ jāhiṁ jab chūṭ

राम नाम खुला बँट रहा है, जितना ले सको ले लो। प्राण छूटने पर पछताओगे।

Ram's name is free for the taking, take all you can. You will regret it when life slips away.

गायन परंपरा से

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शब्दार्थ

लूट
खुली बाँट (free for all)
पाछे
बाद में (later)
प्राण
जान (life breath)

यह दोहा कहाँ मिलता है

गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। यह दोहा कबीर ग्रंथावली या कविता-कौमुदी में इस रूप में नहीं मिला, पर लोक और भजन गायकी में कबीर के नाम से गाया जाता है। स्रोत पाठ

विषय: प्रेम और भक्ति।

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लोग अक्सर पूछते हैं

"लूट सके तो लूट ले, राम नाम की लूट" का अर्थ क्या है?

राम नाम खुला बँट रहा है, जितना ले सको ले लो। प्राण छूटने पर पछताओगे।

यह दोहा किस संग्रह में है?

गायन परंपरा और लोकप्रिय संग्रह। कबीर के दोहे सदियों तक गाए गए, इसलिए शब्दों में थोड़ा फ़र्क मिल सकता है।

What does this doha mean in English?

Ram's name is free for the taking, take all you can. You will regret it when life slips away.

स्रोत और तरीका

पाठ: Kabir Dohavali (Kavitakosh compilation)। अर्थ और शब्दार्थ Wisdom के अपने हैं।

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