ध्यान योग
ध्यान: मन को धीरे-धीरे स्थिर करने का अभ्यास। आसन, श्वास, और अंत में केवल आत्मा।
सभी 47 श्लोक नीचे।
Wisdom translation, edited by Ankur Shukla. Commentary AI-drafted, human-reviewed. Reviewed June 2026. Methodology →

“श्रीभगवान् बोले कर्मफलका आश्रय न लेकर जो कर्तव्यकर्म करता है, वही संन्यासी तथा योगी है और केवल अग्निका त्याग करनेवाला संन्यासी नहीं होता तथा केवल क्रियाओंका त्याग करनेवाला योगी नहीं होता ॥”पूरा श्लोक 6.1 पढ़ें →सभी श्लोक
- 6.1अ. 6
Renunciation means acting without needing to own the result.
श्रीभगवान् बोले कर्मफलका आश्रय न लेकर जो कर्तव्यकर्म करता है, वही संन्यासी तथा योगी है और केवल अग्निका त्याग करनेवाला स…
- 6.2अ. 6
Yoga begins when the mind stops clutching its own agenda.
हे अर्जुन लोग जिसको संन्यास कहते हैं, उसीको तुम योग समझो क्योंकि संकल्पोंका त्याग किये बिना मनुष्य कोईसा भी योगी नहीं ह…
- 6.3अ. 6
You reach steadiness through action, then preserve it through stillness.
जो योगसमता में आरूढ़ होना चाहता है, ऐसे मननशील योगीके लिये कर्तव्यकर्म करना कारण कहा गया है और उसी योगारूढ़ मनुष्यका शम …
- 6.4अ. 6
Yoga begins when neither pleasure nor action can hook you.
जिस समय न इन्द्रियोंके भोगोंमें तथा न कर्मोंमें ही आसक्त होता है, उस समय वह सम्पूर्ण संकल्पोंका त्यागी मनुष्य योगारूढ़ क…
- 6.5अ. 6
Your own inner handling makes you rise or collapse.
अपने द्वारा अपना उद्धार करे, अपना पतन न करे क्योंकि आप ही अपना मित्र है और आप ही अपना शत्रु है ॥
- 6.6अ. 6
The same inner nature that frees you can also fight you.
जिसने अपनेआपसे अपनेआपको जीत लिया है, उसके लिये आप ही अपना बन्धु है और जिसने अपनेआपको नहीं जीता है, ऐसे अनात्माका आत्मा ह…
- 6.7अ. 6
Steadiness makes the highest reality feel near in every opposite.
जिसने अपनेआपपर अपनी विजय कर ली है, उस शीतउष्ण अनुकूलताप्रतिकूलता सुखदुःख तथा मानअपमानमें निर्विकार मनुष्यको परमात्मा नित…
- 6.8अ. 6
True mastery makes gold and dust feel identical.
जिसका अन्तःकरण ज्ञानविज्ञानसे तृप्त है, जो कूटकी तरह निर्विकार है, जितेन्द्रिय है और मिट्टीके ढेले, पत्थर तथा स्वर्णमें …
- 6.9अ. 6
Equal vision toward all people marks the highest steadiness.
सुहृद्, मित्र, वैरी, उदासीन, मध्यस्थ, द्वेष्य और सम्बन्धियोंमें तथा साधुआचरण करनेवालोंमें और पापआचरण करनेवालोंमें भी समब…
- 6.10अ. 6
Steady inward practice begins when desire and possessiveness end.
भोगबुद्धिसे संग्रह न करनेवाला, इच्छारहित और अन्तःकरण तथा शरीरको वशमें रखनेवाला योगी अकेला एकान्तमें स्थित होकर मनको निरन…
- 6.11अ. 6
A steady mind begins with a steady seat.
शुद्ध भूमिपर, जिसपर क्रमशः कुश, मृगछाला और वस्त्र बिछे हैं, जो न अत्यन्त ऊँचा है और न अत्यन्त नीचा, ऐसे अपने आसनको स्थिर…
- 6.12अ. 6
Meditation begins by gathering the mind and training the senses.
उस आसनपर बैठकर चित्त और इन्द्रियोंकी क्रियाओंको वशमें रखते हुए मनको एकाग्र करके अन्तःकरणकी शुद्धिके लिये योगका अभ्यास कर…
- 6.13अ. 6
Steady posture is the first gate to a steady mind.
काया, शिर और ग्रीवाको सीधे अचल धारण करके तथा दिशाओंको न देखकर केवल अपनी नासिकाके अग्रभागको देखते हुए स्थिर होकर बैठे ॥
- 6.14अ. 6
A disciplined mind can rest in devotion without fear.
जिसका अन्तःकरण शान्त है, जो भयरहित है और जो ब्रह्मचारिव्रतमें स्थित है, ऐसा सावधान योगी मनका संयम करके मेरेमें चित्त लगा…
- 6.15अ. 6
A steady mind reaches the peace that restlessness can never touch.
नियत मनवाला योगी मनको इस तरहसे सदा परमात्मामें लगाता हुआ मेरेमें सम्यक् स्थितिवाली जो निर्वाणपरमा शान्ति है, उसको प्राप्…
- 6.16अ. 6
Balance makes meditation possible; extremes break it.
हे अर्जुन यह योग न तो अधिक खानेवालेका और न बिलकुल न खानेवालेका तथा न अधिक सोनेवालेका और न बिलकुल न सोनेवालेका ही सिद्ध …
- 6.17अ. 6
Balanced living makes inner practice possible.
दुःखोंका नाश करनेवाला योग तो यथायोग्य आहार और विहार करनेवालेका, कर्मोंमें यथायोग्य चेष्टा करनेवालेका तथा यथायोग्य सोने औ…
- 6.18अ. 6
Yoga begins when craving loses its grip and the mind comes home.
वशमें किया हुआ चित्त जिस कालमें अपने स्वरूपमें ही स्थित हो जाता है और स्वयं सम्पूर्ण पदार्थोंसे निःस्पृह हो जाता है, उस …
- 6.19अ. 6
A trained mind becomes steady enough to stop flickering.
जैसे स्पन्दनरहित वायुके स्थानमें स्थित दीपककी लौ चेष्टारहित हो जाती है, योगका अभ्यास करते हुए वश में किए हुए चित्तवाले य…
- 6.20अ. 6
Stillness reveals a completeness that no outside thing can improve.
योगका सेवन करनेसे जिस अवस्थामें निरुद्ध चित्त उपराम हो जाता है तथा जिस अवस्थामें स्वयं अपनेआप से अपनेआपको देखता हुआ अपने…
- 6.21अ. 6
True joy is deeper than sensation and keeps you from wavering.
जो सुख आत्यन्तिक, अतीन्द्रिय और बुद्धिग्राह्य है, उस सुखका जिस अवस्थामें अनुभव करता है और जिस सुखमें स्थित हुआ यह ध्यानय…
- 6.22अ. 6
True fulfillment leaves nothing more to chase and nothing strong enough to unsettle you.
जिस लाभकी प्राप्ति होनेपर उससे अधिक कोई दूसरा लाभ उसके माननेमें भी नहीं आता और जिसमें स्थित होनेपर वह बड़े भारी दुःखसे भ…
- 6.23अ. 6
Yoga is the breaking of suffering’s grip, practiced steadily.
जिसमें दुःखोंके संयोगका ही वियोग है, उसीको योग नामसे जानना चाहिये । वह योग जिस ध्यानयोगका लक्ष्य है, उस ध्यानयोगका अभ्य…
- 6.24अ. 6
Desire loses power when the mind stops feeding it.
संकल्पसे उत्पन्न होनेवाली सम्पूर्ण कामनाओंका सर्वथा त्याग करके और मनसे ही इन्द्रियसमूहको सभी ओरसे हटाकर ॥
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- 6.25अ. 6
Stillness comes by degrees when the mind stops feeding itself.
धैर्ययुक्त बुद्धिके द्वारा संसारसे धीरेधीरे उपराम हो जाय और परमात्मस्वरूपमें मनबुद्धि को सम्यक् प्रकारसे स्थापन करके फिर…
- 6.26अ. 6
The mind is mastered by repeated return, not by force.
यह अस्थिर और चञ्चल मन जहाँजहाँ विचरण करता है, वहाँवहाँसे हटाकर इसको एक परमात्मामें ही लगाये ॥
- 6.27अ. 6
Joy comes when the restless mind finally becomes still.
जिसके सब पाप नष्ट हो गये हैं, जिसका रजोगुण तथा मन सर्वथा शान्तनिर्मल हो गया है, ऐसे इस ब्रह्मस्वरूप योगीको निश्चित ही उत…
- 6.28अ. 6
Repeated union with the supreme reality yields effortless, lasting joy.
इस प्रकार अपनेआपको सदा परमात्मामें लगाता हुआ पापरहित योगी सुखपूर्वक ब्रह्मप्राप्तिरूप अत्यन्त सुखको प्राप्त हो जाता है ॥
- 6.29अ. 6
Equal vision dissolves the illusion of separation.
सब जगह अपने स्वरूपको देखनेवाला और ध्यानयोगसे युक्त अन्तःकरणवाला योगा अपने स्वरूपको सम्पूर्ण प्राणियोंमें स्थित देखता है …
- 6.30अ. 6
Seeing the divine everywhere ends separation.
जो सबमें मुझे देखता है और सबको मुझमें देखता है, उसके लिये मैं अदृश्य नहीं होता और वह मेरे लिये अदृश्य नहीं होता ॥
- 6.31अ. 6
Unity turns every action into abiding presence.
मेरेमें एकीभावसे स्थित हुआ जो योगी सम्पूर्ण प्राणियोंमें स्थित मेरा भजन करता है, वह सब कुछ बर्ताव करता हुआ भी मेरेमें ही…
- 6.32अ. 6
Equal vision makes you unshaken by pleasure or pain.
हे अर्जुन जो ध्यानयुक्त ज्ञानी महापुरुष अपने शरीरकी उपमासे सब जगह अपनेको समान देखता है और सुख अथवा दुःखको भी समान देखता…
- 6.33अ. 6
Restlessness makes even clear teaching feel unreachable.
अर्जुन बोले हे मधुसूदन आपने समतापूर्वक जो यह योग कहा है, मनकी चञ्चलताके कारण मैं इस योगकी स्थिर स्थिति नहीं देखता हूँ …
- 6.34अ. 6
The mind resists control like wind resists the hand.
क्योंकि हे कृष्ण मन बड़ा ही चञ्चल, प्रमथनशील, दृढ़ जिद्दी और बलवान् है । उसका निग्रह करना मैं वायुकी तरह अत्यन्त कठिन …
- 6.35अ. 6
A restless mind is not a verdict; it is a training ground.
श्रीभगवान् बोले हे महाबाहो यह मन बड़ा चञ्चल है और इसका निग्रह करना भी बड़ा कठिन है यह तुम्हारा कहना बिलकुल ठीक है । …
- 6.36अ. 6
Yoga becomes reachable when the mind is trained, not merely hoped for.
जिसका मन पूरा वशमें नहीं है, उसके द्वारा योग प्राप्त होना कठिन है । परन्तु उपायपूर्वक यत्न करनेवाले वश्यात्माको योग प्र…
- 6.37अ. 6
Faith without completion still deserves a clear answer.
अर्जुन बोले हे कृष्ण जिसकी साधनमें श्रद्धा है, पर जिसका प्रयत्न शिथिल है, वह अन्तसमयमें अगर योगसे विचलितमना हो जाय, तो…
- 6.38अ. 6
Half-finished striving can feel like total ruin.
हे महाबाहो संसारके आश्रयसे रहित और परमात्मप्राप्तिके मार्गमें मोहित अर्थात् विचलित इस तरह दोनों ओरसे भ्रष्ट हुआ साधक क…
- 6.39अ. 6
Only clear seeing can end confusion completely.
हे कृष्ण मेरे इस सन्देहका सर्वथा छेदन करनेके लिये आप ही योग्य हैं क्योंकि इस संशयका छेदन करनेवाला आपके सिवाय दूसरा कोई ह…
- 6.40अ. 6
Sincere effort toward the good cannot end in ruin.
श्रीभगवान् बोले हे पृथानन्दन उसका न तो इस लोकमें और न परलोकमें ही विनाश होता है क्योंकि हे प्यारे कल्याणकारी काम करने…
- 6.41अ. 6
A fall from yoga still carries you forward.
वह योगभ्रष्ट पुण्यकर्म करनेवालोंके लोकोंको प्राप्त होकर और वहाँ बहुत वर्षोंतक रहकर फिर यहाँ शुद्ध श्रीमानोंके घरमें जन्म…
- 6.42अ. 6
A fallen practitioner is not lost; the next birth can restart the work.
अथवा वैराग्यवान् योगभ्रष्ट ज्ञानवान् योगियोंके कुलमें ही जन्म लेता है । इस प्रकारका जो यह जन्म है, यह संसारमें बहुत ही …
- 6.43अ. 6
Nothing gained in sincere practice is ever truly lost.
हे कुरुनन्दन वहाँपर उसको पूर्वजन्मकृत साधनसम्पत्ति अनायास ही प्राप्त हो जाती है । फिर उससे वह साधनकी सिद्धिके विषयमें …
- 6.44अ. 6
Earlier practice keeps pulling you forward, even against resistance.
वह श्रीमानोंके घरमें जन्म लेनेवाला योगभ्रष्ट मनुष्य भोगोंके परवश होता हुआ भी पूर्वजन्ममें किये हुए अभ्याससाधन के कारण ही…
- 6.45अ. 6
Persistent striving eventually ripens into the highest fulfillment.
परन्तु जो योगी प्रयत्नपूर्वक यत्न करता है और जिसके पाप नष्ट हो गये हैं तथा जो अनेक जन्मोंसे सिद्ध हुआ है, वह योगी फिर पर…
- 6.46अ. 6
Inner mastery outranks every outer path.
सकामभाववाले तपस्वियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है, ज्ञानियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है और कर्मियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है ऐसा मेरा मत…
- 6.47अ. 6
Trusting devotion is the highest integration of yoga.
सम्पूर्ण योगियोंमें भी जो श्रद्धावान् भक्त मुझमें तल्लीन हुए मनसे मेरा भजन करता है, वह मेरे मतमें सर्वश्रेष्ठ योगी है ॥