श्री कृष्ण का सबसे प्रसिद्ध वचन कौन सा है?
गीता 2.47, कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन: तुम्हारा अधिकार सिर्फ़ कर्म पर है, उसके फल पर कभी नहीं। इसके बाद सबसे ज़्यादा खोजे जाते हैं 4.7, यदा यदा हि धर्मस्य, और 18.66, सर्वधर्मान्परित्यज्य।
क्या गीता में राधा का ज़िक्र है?
नहीं। भगवद गीता में राधा का नाम एक बार भी नहीं आता। राधा का वर्णन बाद के भक्ति ग्रंथों में मिलता है, जैसे ब्रह्मवैवर्त पुराण और जयदेव का गीत गोविंद, इसलिए "राधा से कृष्ण ने कहा" वाली पंक्तियाँ गीता की नहीं हैं।
क्या कृष्ण ने कहा था "जो हुआ अच्छा हुआ"?
गीता के किसी श्लोक में यह बात नहीं है। यह पंक्ति "गीता सार" वाले पोस्टर से आती है, जो हिंदी में लिखा एक आधुनिक सार है। इसके सबसे क़रीब असली श्लोक 2.11 है, जहाँ कृष्ण कहते हैं कि ज्ञानी न जीते हुओं का शोक करते हैं, न मरे हुओं का।
कृष्ण स्टेटस के लिए कौन सा वचन अच्छा है?
छोटे वचन सबसे अच्छे लगते हैं: 2.50, योगः कर्मसु कौशलम्, 9.31, न मे भक्तः प्रणश्यति, या 2.48, समत्वं योग उच्यते। ऊपर स्टेटस वाले हिस्से में हर वचन श्लोक संख्या के साथ कॉपी होता है।
असली कृष्ण वचन कैसे पहचानें?
श्लोक संख्या पूछिए। अर्जुन को दिया गया कृष्ण का उपदेश भगवद गीता है, जिसके 700 श्लोक गिने हुए हैं, इसलिए हर असली वचन के साथ 2.47 या 9.22 जैसी संख्या और संस्कृत मूल होता है।
कर्मण्येवाधिकारस्ते का मतलब क्या है?
गीता 2.47 में कृष्ण कहते हैं: तुम्हारा अधिकार कर्म करने में है, फल में कभी नहीं। फल को काम की वजह मत बनाओ, और काम न करने से भी मत चिपको।