भगवद् गीता में Dhyana
ध्यान केवल एक विधि नहीं — एक अवस्था है। गीता इस पर सटीक है: आसन कैसा हो, मन क्या करे, सफलता के लक्षण क्या हैं। और यह सबसे कठिन साधना क्यों है और सबसे आवश्यक भी।
न ह्यसंन्यस्तसङ्कल्पो योगी भवति कश्चन ॥
योगारूढस्य तस्यैव शमः कारणमुच्यते ॥
सर्वसङ्कल्पसंन्यासी योगारूढस्तदोच्यते ॥
- 6.8अ. 6
True mastery makes gold and dust feel identical.
जिसका अन्तःकरण ज्ञानविज्ञानसे तृप्त है, जो कूटकी तरह निर्विकार है, जितेन्द्रिय है और मिट्टीके ढेले, पत्थर तथा स्वर्णमें
- 6.10अ. 6
Steady inward practice begins when desire and possessiveness end.
भोगबुद्धिसे संग्रह न करनेवाला, इच्छारहित और अन्तःकरण तथा शरीरको वशमें रखनेवाला योगी अकेला एकान्तमें स्थित होकर मनको निरन
- 6.11अ. 6
A steady mind begins with a steady seat.
शुद्ध भूमिपर, जिसपर क्रमशः कुश, मृगछाला और वस्त्र बिछे हैं, जो न अत्यन्त ऊँचा है और न अत्यन्त नीचा, ऐसे अपने आसनको स्थिर
- 6.12अ. 6
Meditation begins by gathering the mind and training the senses.
उस आसनपर बैठकर चित्त और इन्द्रियोंकी क्रियाओंको वशमें रखते हुए मनको एकाग्र करके अन्तःकरणकी शुद्धिके लिये योगका अभ्यास कर
- 6.13अ. 6
Steady posture is the first gate to a steady mind.
काया, शिर और ग्रीवाको सीधे अचल धारण करके तथा दिशाओंको न देखकर केवल अपनी नासिकाके अग्रभागको देखते हुए स्थिर होकर बैठे ॥
- 6.14अ. 6
A disciplined mind can rest in devotion without fear.
जिसका अन्तःकरण शान्त है, जो भयरहित है और जो ब्रह्मचारिव्रतमें स्थित है, ऐसा सावधान योगी मनका संयम करके मेरेमें चित्त लगा
- 6.15अ. 6
A steady mind reaches the peace that restlessness can never touch.
नियत मनवाला योगी मनको इस तरहसे सदा परमात्मामें लगाता हुआ मेरेमें सम्यक् स्थितिवाली जो निर्वाणपरमा शान्ति है, उसको प्राप्
- 6.16अ. 6
Balance makes meditation possible; extremes break it.
हे अर्जुन यह योग न तो अधिक खानेवालेका और न बिलकुल न खानेवालेका तथा न अधिक सोनेवालेका और न बिलकुल न सोनेवालेका ही सिद्ध
- 6.17अ. 6
Balanced living makes inner practice possible.
दुःखोंका नाश करनेवाला योग तो यथायोग्य आहार और विहार करनेवालेका, कर्मोंमें यथायोग्य चेष्टा करनेवालेका तथा यथायोग्य सोने औ
- 6.18अ. 6
Yoga begins when craving loses its grip and the mind comes home.
वशमें किया हुआ चित्त जिस कालमें अपने स्वरूपमें ही स्थित हो जाता है और स्वयं सम्पूर्ण पदार्थोंसे निःस्पृह हो जाता है, उस
- 6.19अ. 6
A trained mind becomes steady enough to stop flickering.
जैसे स्पन्दनरहित वायुके स्थानमें स्थित दीपककी लौ चेष्टारहित हो जाती है, योगका अभ्यास करते हुए वश में किए हुए चित्तवाले य
- 6.20अ. 6
Stillness reveals a completeness that no outside thing can improve.
योगका सेवन करनेसे जिस अवस्थामें निरुद्ध चित्त उपराम हो जाता है तथा जिस अवस्थामें स्वयं अपनेआप से अपनेआपको देखता हुआ अपने
- 6.21अ. 6
True joy is deeper than sensation and keeps you from wavering.
जो सुख आत्यन्तिक, अतीन्द्रिय और बुद्धिग्राह्य है, उस सुखका जिस अवस्थामें अनुभव करता है और जिस सुखमें स्थित हुआ यह ध्यानय
- 6.22अ. 6
True fulfillment leaves nothing more to chase and nothing strong enough to unsettle you.
जिस लाभकी प्राप्ति होनेपर उससे अधिक कोई दूसरा लाभ उसके माननेमें भी नहीं आता और जिसमें स्थित होनेपर वह बड़े भारी दुःखसे भ
- 6.24अ. 6
Desire loses power when the mind stops feeding it.
संकल्पसे उत्पन्न होनेवाली सम्पूर्ण कामनाओंका सर्वथा त्याग करके और मनसे ही इन्द्रियसमूहको सभी ओरसे हटाकर ॥
- 6.25अ. 6
Stillness comes by degrees when the mind stops feeding itself.
धैर्ययुक्त बुद्धिके द्वारा संसारसे धीरेधीरे उपराम हो जाय और परमात्मस्वरूपमें मनबुद्धि को सम्यक् प्रकारसे स्थापन करके फिर
- 6.26अ. 6
The mind is mastered by repeated return, not by force.
यह अस्थिर और चञ्चल मन जहाँजहाँ विचरण करता है, वहाँवहाँसे हटाकर इसको एक परमात्मामें ही लगाये ॥
- 6.27अ. 6
Joy comes when the restless mind finally becomes still.
जिसके सब पाप नष्ट हो गये हैं, जिसका रजोगुण तथा मन सर्वथा शान्तनिर्मल हो गया है, ऐसे इस ब्रह्मस्वरूप योगीको निश्चित ही उत
- 6.28अ. 6
Repeated union with the supreme reality yields effortless, lasting joy.
इस प्रकार अपनेआपको सदा परमात्मामें लगाता हुआ पापरहित योगी सुखपूर्वक ब्रह्मप्राप्तिरूप अत्यन्त सुखको प्राप्त हो जाता है ॥
- 6.29अ. 6
Equal vision dissolves the illusion of separation.
सब जगह अपने स्वरूपको देखनेवाला और ध्यानयोगसे युक्त अन्तःकरणवाला योगा अपने स्वरूपको सम्पूर्ण प्राणियोंमें स्थित देखता है
- 6.30अ. 6
Seeing the divine everywhere ends separation.
जो सबमें मुझे देखता है और सबको मुझमें देखता है, उसके लिये मैं अदृश्य नहीं होता और वह मेरे लिये अदृश्य नहीं होता ॥
- 6.32अ. 6
Equal vision makes you unshaken by pleasure or pain.
हे अर्जुन जो ध्यानयुक्त ज्ञानी महापुरुष अपने शरीरकी उपमासे सब जगह अपनेको समान देखता है और सुख अथवा दुःखको भी समान देखता
- 6.34अ. 6
The mind resists control like wind resists the hand.
क्योंकि हे कृष्ण मन बड़ा ही चञ्चल, प्रमथनशील, दृढ़ जिद्दी और बलवान् है । उसका निग्रह करना मैं वायुकी तरह अत्यन्त कठिन
- 6.35अ. 6
A restless mind is not a verdict; it is a training ground.
श्रीभगवान् बोले हे महाबाहो यह मन बड़ा चञ्चल है और इसका निग्रह करना भी बड़ा कठिन है यह तुम्हारा कहना बिलकुल ठीक है ।
- 6.36अ. 6
Yoga becomes reachable when the mind is trained, not merely hoped for.
जिसका मन पूरा वशमें नहीं है, उसके द्वारा योग प्राप्त होना कठिन है । परन्तु उपायपूर्वक यत्न करनेवाले वश्यात्माको योग प्र
- 6.44अ. 6
Earlier practice keeps pulling you forward, even against resistance.
वह श्रीमानोंके घरमें जन्म लेनेवाला योगभ्रष्ट मनुष्य भोगोंके परवश होता हुआ भी पूर्वजन्ममें किये हुए अभ्याससाधन के कारण ही
- 12.12अ. 12
Peace begins when you stop clinging to what your action produces.
अभ्याससे शास्त्रज्ञान श्रेष्ठ है, शास्त्रज्ञानसे ध्यान श्रेष्ठ है और ध्यानसे भी सब कर्मोंके फलका त्याग श्रेष्ठ है । कर्
- 13.25अ. 13
The same realization opens through different disciplines.
कई मनुष्य ध्यानयोगके द्वारा, कई सांख्ययोगके द्वारा और कई कर्मयोगके द्वारा अपनेआपसे अपनेआपमें परमात्मतत्त्वका अनुभव करते