विभूति योग
विभूतियाँ। जहाँ भी उत्कृष्टता है, बल, सौंदर्य, ज्ञान, कृष्ण उसका बीज हैं।
सभी 42 श्लोक नीचे।
Wisdom translation, edited by Ankur Shukla. Commentary AI-drafted, human-reviewed. Reviewed June 2026. Methodology →

“श्रीभगवान् बोले हे महाबाहो अर्जुन मेरे परम वचनको तुम फिर भी सुनो, जिसे मैं तुम्हारे हितकी कामनासे कहूँगा क्योंकि तुम मेरेमें अत्यन्त प्रेम रखते हो ॥”पूरा श्लोक 10.1 पढ़ें →सभी श्लोक
- 10.1अ. 10
Deeper truth arrives as care for the one who is ready.
श्रीभगवान् बोले हे महाबाहो अर्जुन मेरे परम वचनको तुम फिर भी सुनो, जिसे मैं तुम्हारे हितकी कामनासे कहूँगा क्योंकि तुम म…
- 10.2अ. 10
Even the highest knowers stand inside the source they seek.
मेरे प्रकट होनेको न देवता जानते हैं और न महर्षि क्योंकि मैं सब प्रकारसे देवताओं और महर्षियोंका आदि हूँ ॥
- 10.3अ. 10
Clear recognition of the divine ends confusion and frees action.
जो मनुष्य मुझे अजन्मा, अनादि और सम्पूर्ण लोकोंका महान् ईश्वर जानता है अर्थात् दृढ़तासे मानता है, वह मनुष्योंमें असम्मूढ़…
- 10.4अ. 10
All human qualities arise from the same source.
बुद्धि, ज्ञान, असम्मोह, क्षमा, सत्य, दम, शम, सुख, दुःख, भव, अभाव, भय, अभय, अहिंसा, समता, तुष्टि, तप, दान, यश और अपयश प्…
- 10.5अ. 10
All qualities are expressions of the same divine source.
बुद्धि, ज्ञान, असम्मोह, क्षमा, सत्य, दम, शम, सुख, दुःख, भव, अभाव, भय, अभय, अहिंसा, समता, तुष्टि, तप, दान, यश और अपयश प्…
- 10.6अ. 10
All lineages and worlds emerge from Krishna’s mind.
सात महर्षि और उनसे भी पूर्वमें होनेवाले चार सनकादि तथा चौदह मनु ये सबकेसब मेरे मनसे पैदा हुए हैं और मेरेमें भाव श्रद्धा…
- 10.7अ. 10
True recognition of Krishna's presence makes devotion unshakable.
जो मनुष्य मेरी इस विभूतिको और योगको तत्त्वसे जानता है अर्थात् दृढ़तापूर्वक मानता है, वह अविचल भक्तियोगसे युक्त हो जाता ह…
- 10.8अ. 10
Knowing the source turns understanding into devotion.
मैं संसारमात्रका प्रभव मूलकारण हूँ, और मुझसे ही सारा संसार प्रवृत्त हो रहा है अर्थात् चेष्टा कर रहा है ऐसा मेरेको मानकर…
- 10.9अ. 10
Shared remembrance keeps devotion alive.
मेरेमें चित्तवाले, मेरेमें प्राणोंको अर्पण करनेवाले भक्तजन आपसमें मेरे गुण, प्रभाव आदिको जानते हुए और उनका कथन करते हुए …
- 10.10अ. 10
Steady devotion itself draws forth the understanding that reaches the divine.
उन नित्यनिरन्तर मेरेमें लगे हुए और प्रेमपूर्वक मेरा भजन करनेवाले भक्तोंको मैं वह बुद्धियोग देता हूँ, जिससे उनको मेरी प्र…
- 10.11अ. 10
Compassion becomes knowledge that burns away inner darkness.
उन भक्तोंपर कृपा करनेके लिये ही उनके स्वरूप होनेपन में रहनेवाला मैं उनके अज्ञानजन्य अन्धकारको देदीप्यमान ज्ञानरूप दीपकके…
- 10.12अ. 10
Recognition turns into surrender when the highest reality stands revealed.
अर्जुन बोले परम ब्रह्म, परम धाम और महान् पवित्र आप ही हैं । आप शाश्वत, दिव्य पुरुष, आदिदेव, अजन्मा और विभु व्यापक हैं …
- 10.13अ. 10
The deepest recognition is echoed by the wise and by Krishna himself.
अर्जुन बोले परम ब्रह्म, परम धाम और महान् पवित्र आप ही हैं । आप शाश्वत, दिव्य पुरुष, आदिदेव, अजन्मा और विभु व्यापक हैं …
- 10.14अ. 10
True recognition begins where ordinary beings cannot see.
हे केशव मेरेसे आप जो कुछ कह रहे हैं, यह सब मैं सत्य मानता हूँ । हे भगवन् आपके प्रकट होनेको न तो देवता जानते हैं और न …
- 10.15अ. 10
The supreme one is known fully only by the supreme one.
हे भूतभावन हे भूतेश हे देवदेव हे जगत्पते हे पुरुषोत्तम आप स्वयं ही अपनेआपसे अपनेआपको जानते हैं ॥
- 10.16अ. 10
Only the source can fully name its own presence in the world.
जिन विभूतियोंसे आप इन सम्पूर्ण लोकोंको व्याप्त करके स्थित हैं, उन सभी अपनी दिव्य विभूतियोंका सम्पूर्णतासे वर्णन करनेमें …
- 10.17अ. 10
Devotion needs a form the mind can return to again and again.
हे योगिन् हरदम साङ्गोपाङ्ग चिन्तन करता हुआ मैं आपको कैसे जानूँ और हे भगवन् किनकिन भावोंमें आप मेरे द्वारा चिन्तन किये…
- 10.18अ. 10
True devotion never feels finished hearing the beloved.
हे जनार्दन आप अपने योग सामर्थ्य को और विभूतियोंको विस्तारसे फिर कहिये क्योंकि आपके अमृतमय वचन सुनतेसुनते मेरी तृप्ति नह…
- 10.19अ. 10
The divine can be named briefly, never exhausted.
श्रीभगवान् बोले हाँ, ठीक है । मैं अपनी दिव्य विभूतियोंको तेरे लिये प्रधानतासे संक्षेपसे कहूँगा क्योंकि हे कुरुश्रेष्ठ …
- 10.20अ. 10
Everything that exists is held within one enduring presence.
हे नींदको जीतनेवाले अर्जुन सम्पूर्ण प्राणियोंके आदि, मध्य तथा अन्तमें भी मैं ही हूँ और प्राणियोंके अन्तःकरणमें आत्मरूपस…
- 10.21अ. 10
Every radiance is a sign of one presence.
मैं अदितिके पुत्रोंमें विष्णु वामन और प्रकाशमान वस्तुओंमें किरणोंवाला सूर्य हूँ । मैं मरुतोंका तेज और नक्षत्रोंका अधिपत…
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- 10.22अ. 10
The divine is not elsewhere; it is the awareness within everything.
मैं वेदोंमें सामवेद हूँ, देवताओंमें इन्द्र हूँ, इन्द्रियोंमें मन हूँ और प्राणियोंकी चेतना हूँ ॥
- 10.23अ. 10
Greatness in the world is a visible sign of Krishna's presence.
रुद्रोंमें शंकर और यक्षराक्षसोंमें कुबेर मैं हूँ । वसुओंमें पावक अग्नि और शिखरवाले पर्वतोंमें सुमेरु मैं हूँ ॥
- 10.24अ. 10
Greatness in the world is a trace of Krishna everywhere.
हे पार्थ पुरोहितोंमें मुख्य बृहस्पतिको मेरा स्वरूप समझो । सेनापतियोंमें स्कन्द और जलाशयोंमें समुद्र मैं हूँ ॥
- 10.25अ. 10
The divine appears through the noblest forms of speech, ritual, and nature.
महर्षियोंमें भृगु और वाणियोंशब्दों में एक अक्षर अर्थात् प्रणव मैं हूँ । सम्पूर्ण यज्ञोंमें जपयज्ञ और स्थिर रहनेवालोंमें…
- 10.26अ. 10
The finest forms in creation are windows into Krishna.
सम्पूर्ण वृक्षोंमें पीपल, देवर्षियोंमें नारद, गन्धर्वोंमें चित्ररथ और सिद्धोंमें कपिल मुनि मैं हूँ ॥
- 10.27अ. 10
Greatness in the world is a visible trace of Krishna.
घोड़ोंमें अमृतके साथ समुद्रसे प्रकट होनेवाले उच्चैःश्रवा नामक घोड़ेको, श्रेष्ठ हाथियोंमें ऐरावत नामक हाथीको और मनुष्योंम…
- 10.28अ. 10
Power, fertility, and danger all reveal the same source.
आयुधोंमें वज्र और धेनुओंमें कामधेनु मैं हूँ । सन्तानउत्पत्तिका हेतु कामदेव मैं हूँ और सर्पोंमें वासुकि मैं हूँ ॥
- 10.29अ. 10
The divine is visible in every order of existence.
नागोंमें अनन्त शेषनाग और जलजन्तुओंका अधिपति वरुण मैं हूँ । पितरोंमें अर्यमा और शासन करनेवालोंमें यमराज मैं हूँ ॥
- 10.30अ. 10
Power, devotion, and majesty are all windows into one presence.
दैत्योंमें प्रह्लाद और गणना करनेवालोंमें काल मैं हूँ । पशुओंमें सिंह और पक्षियोंमें गरुड मैं हूँ ॥
- 10.31अ. 10
One reality appears as every noble force.
पवित्र करनेवालोंमें वायु और शास्त्रधारियोंमें राम मैं हूँ । जलजन्तुओंमें मगर मैं हूँ । बहनेवाले स्त्रोतोंमें गङ्गाजी म…
- 10.32अ. 10
All creation and all truth-seeking speech point back to Krishna.
हे अर्जुन सम्पूर्ण सर्गोंके आदि, मध्य तथा अन्तमें मैं ही हूँ । विद्याओंमें अध्यात्मविद्या और परस्पर शास्त्रार्थ करनेवा…
- 10.33अ. 10
Even letters and time carry Krishna's presence.
अक्षरोंमें अकार और समासोंमें द्वन्द्व समास मैं हूँ । अक्षयकाल अर्थात् कालका भी महाकाल तथा सब ओर मुखवाला धाता भी मैं हूँ…
- 10.34अ. 10
Even death and virtue are expressions of the same divine source.
सबका हरण करनेवाली मृत्यु और उत्पन्न होनेवालोंका उभ्दव मैं हूँ तथा स्त्रीजातिमें कीर्ति, श्री, वाक्, स्मृति, मेधा, धृति औ…
- 10.35अ. 10
Sacred sound, time, and spring all carry the same presence.
गायी जानेवाली श्रुतियोंमें बृहत्साम और वैदिक छन्दोंमें गायत्री छन्द मैं हूँ । बारह महीनोंमें मार्गशीर्ष और छः ऋतुओंमें …
- 10.36अ. 10
What shines through victory and resolve is not separate from the divine.
छल करनेवालोंमें जूआ और तेजस्वियोंमें तेज मैं हूँ । जीतनेवालोंकी विजय, निश्चय करनेवालोंका निश्चय और सात्त्विक मनुष्योंका…
- 10.37अ. 10
Greatness in many forms is one presence showing itself.
वृष्णिवंशियोंमें वासुदेव और पाण्डवोंमें धनञ्जय मैं हूँ । मुनियोंमें वेदव्यास और कवियोंमें कवि शुक्राचार्य भी मैं हूँ ॥
- 10.38अ. 10
True power is measured by restraint, silence, and clear understanding.
दमन करनेवालोंमें दण्डनीति और विजय चाहनेवालोंमें नीति मैं हूँ । गोपनीय भावोंमें मौन और ज्ञानवानोंमें ज्ञान मैं हूँ ॥
- 10.39अ. 10
All existence grows from one hidden source.
हे अर्जुन सम्पूर्ण प्राणियोंका जो बीज है, वह बीज मैं ही हूँ क्योंकि मेरे बिना कोई भी चरअचर प्राणी नहीं है अर्थात् चरअचर …
- 10.40अ. 10
No list can contain the divine's endless expressions.
हे परंतप अर्जुन मेरी दिव्य विभूतियोंका अन्त नहीं है । मैंने तुम्हारे सामने अपनी विभूतियोंका जो विस्तार कहा है, यह तो क…
- 10.41अ. 10
Every genuine greatness is only a spark of my radiance.
जोजो ऐश्वर्ययुक्त, शोभायुक्त और बलयुक्त प्राणी तथा वस्तु है, उसउसको तुम मेरे ही तेजयोग के अंशसे उत्पन्न हुई समझो ॥
- 10.42अ. 10
The whole universe rests in a single fragment of the divine.
अथवा हे अर्जुन तुम्हें इस प्रकार बहुतसी बातें जाननेकी क्या आवश्यकता है मैं अपने किसी एक अंशसे सम्पूर्ण जगत् को व्याप्त …