अध्याय 13 · क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ का योग

क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

क्षेत्र और क्षेत्रज्ञ। शरीर, संसार, और दोनों को देखती चेतना। आत्म-विचार यहीं से।

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Wisdom translation, edited by Ankur Shukla. Commentary AI-drafted, human-reviewed. Reviewed June 2026. Methodology →

Krishna on the field and the knower of the field
प्रथम श्लोक · 13.1
अर्जुन उवाचप्रकृतिं पुरुषं चैव क्षेत्रं क्षेत्रज्ञमेव च । एतद्वेदितुमिच्छामि ज्ञानं ज्ञेयं च केशव ॥
श्रीभगवान् बोलेहे कुन्तीपुत्र अर्जुन यहरूपसे कहे जानेवाले शरीरको क्षेत्र कहते हैं और इस क्षेत्रको जो जानता है, उसको ज्ञानीलोग क्षेत्रज्ञ नामसे कहते हैं ॥
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