भगवद् गीता में Krishna
जहाँ वक्ता का नाम लिया गया है, वे श्लोक यहाँ हैं — जहाँ कृष्ण स्वयं बोलते हैं।
विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः ॥
तान्यहं वेद सर्वाणि न त्वं वेत्थ परन्तप ॥
येन भूतान्यशेषेण द्रक्ष्यस्यात्मन्यथो मयि ॥
- 6.39अ. 6
Only clear seeing can end confusion completely.
हे कृष्ण मेरे इस सन्देहका सर्वथा छेदन करनेके लिये आप ही योग्य हैं क्योंकि इस संशयका छेदन करनेवाला आपके सिवाय दूसरा कोई ह
- 7.14अ. 7
The way beyond the veil is not force, but refuge.
क्योंकि मेरी यह गुणमयी दैवी माया बड़ी दुरत्यय है अर्थात् इससे पार पाना बड़ा कठिन है । जो केवल मेरे ही शरण होते हैं, वे
- 8.5अ. 8
The last remembered presence shapes the next state of being.
जो मनुष्य अन्तकालमें भी मेरा स्मरण करते हुए शरीर छोड़कर जाता है, वह मेरे स्वरुप को ही प्राप्त होता है, इसमें सन्देह नहीं
- 8.15अ. 8
True arrival ends the need to come back.
महात्मालोग मुझे प्राप्त करके दुःखालय और अशाश्वत पुनर्जन्मको प्राप्त नहीं होते क्योंकि वे परमसिद्धिको प्राप्त हो गये हैं
- 8.16अ. 8
Even the highest attainments return, but union with Krishna does not.
हे अर्जुन ब्रह्मलोकतक सभी लोक पुनरावर्ती है परन्तु हे कौन्तेय मुझे प्राप्त होनेपर पुनर्जन्म नहीं होता ॥
- 9.3अ. 9
Without trust, the highest teaching cannot carry you beyond repetition.
हे परंतप इस धर्मकी महिमापर श्रद्धा न रखनेवाले मनुष्य मेरे प्राप्त न होकर मृत्युरूप संसारके मार्गमें लौटते रहते हैं अर्था
- 9.25अ. 9
Devotion does not stay abstract; it carries you to its chosen end.
सकामभावसे देवताओंका पूजन करनेवाले शरीर छोड़नेपर देवताओंको प्राप्त होते हैं । पितरोंका पूजन करनेवाले पितरोंको प्राप्त हो
- 10.3अ. 10
Clear recognition of the divine ends confusion and frees action.
जो मनुष्य मुझे अजन्मा, अनादि और सम्पूर्ण लोकोंका महान् ईश्वर जानता है अर्थात् दृढ़तासे मानता है, वह मनुष्योंमें असम्मूढ़
- 10.7अ. 10
True recognition of Krishna's presence makes devotion unshakable.
जो मनुष्य मेरी इस विभूतिको और योगको तत्त्वसे जानता है अर्थात् दृढ़तापूर्वक मानता है, वह अविचल भक्तियोगसे युक्त हो जाता ह
- 10.8अ. 10
Knowing the source turns understanding into devotion.
मैं संसारमात्रका प्रभव मूलकारण हूँ, और मुझसे ही सारा संसार प्रवृत्त हो रहा है अर्थात् चेष्टा कर रहा है ऐसा मेरेको मानकर
- 10.20अ. 10
Everything that exists is held within one enduring presence.
हे नींदको जीतनेवाले अर्जुन सम्पूर्ण प्राणियोंके आदि, मध्य तथा अन्तमें भी मैं ही हूँ और प्राणियोंके अन्तःकरणमें आत्मरूपस
- 10.41अ. 10
Every genuine greatness is only a spark of my radiance.
जोजो ऐश्वर्ययुक्त, शोभायुक्त और बलयुक्त प्राणी तथा वस्तु है, उसउसको तुम मेरे ही तेजयोग के अंशसे उत्पन्न हुई समझो ॥
- 10.42अ. 10
The whole universe rests in a single fragment of the divine.
अथवा हे अर्जुन तुम्हें इस प्रकार बहुतसी बातें जाननेकी क्या आवश्यकता है मैं अपने किसी एक अंशसे सम्पूर्ण जगत् को व्याप्त
- 11.18अ. 11
What appears overwhelming is actually the world’s deepest support.
आप ही जाननेयोग्य परम अक्षर अक्षरब्रह्म हैं, आप ही इस सम्पूर्ण विश्वके परम आश्रय हैं, आप ही सनातनधर्मके रक्षक हैं और आप ह
- 11.22अ. 11
Even the highest beings stand astonished before Krishna's vastness.
जो ग्यारह रुद्र, बारह आदित्य, आठ वसु, बारह साध्यगण, दस विश्वेदेव और दो अश्विनीकुमार, उनचास मरुद्गण, सात पितृगण तथा गन्धर
- 11.24अ. 11
A true vision can shatter the mind before it can steady it.
हे विष्णो आपके अनेक देदीप्यमान वर्ण हैं, आप आकाशको स्पर्श कर रहे हैं, आपका मुख फैला हुआ है आपके नेत्र प्रदीप्त और विशाल
- 11.30अ. 11
Total power leaves no room for control.
आप अपने प्रज्वलित मुखोंद्वारा सम्पूर्ण लोकोंका ग्रसन करते हुए उन्हें चारों ओरसे बारबार चाट रहे हैं और हे विष्णो आपका उग
- 11.34अ. 11
The battle is already decided; your task is only to act.
द्रोण, भीष्म, जयद्रथ और कर्ण तथा अन्य सभी मेरे द्वारा मारे हुए शूरवीरोंको तुम मारो । तुम व्यथा मत करो और युद्ध करो । य
- 11.42अ. 11
Familiarity can hide greatness until awe breaks through.
आपकी महिमा और स्वरूपको न जानते हुए मेरे सखा हैं ऐसा मानकर मैंने प्रमादसे अथवा प्रेमसे भी हठपूर्वक बिना सोचेसमझे हे कृष्ण
- 11.44अ. 11
True reverence asks forgiveness without excuses.
इसलिये शरीरसे लम्बा पड़कर स्तुति करनेयोग्य आप ईश्वरको मैं प्रणाम करके प्रसन्न करना चाहता हूँ । जैसे पिता पुत्रके, मित्र
- 11.46अ. 11
The infinite can overwhelm; devotion asks for a form the heart can bear.
मैं आपको वैसे ही किरीटधारी, गदाधारी और हाथमें चक्र लिये हुए देखना चाहता हूँ । इसलिये हे सहस्रबाहो हे विश्वमूर्ते आप उ
- 12.2अ. 12
Full trust and steady remembrance make devotion complete.
मेरेमें मनको लगाकर नित्यनिरन्तर मेरेमें लगे हुए जो भक्त परम श्रद्धासे युक्त होकर मेरी उपासना करते हैं, वे मेरे मतमें सर्
- 14.4अ. 14
All forms arise from one source, and the divine gives them life.
हे कुन्तीनन्दन सम्पूर्ण योनियोंमें प्राणियोंके जितने शरीर पैदा होते हैं, उन सबकी मूल प्रकृति तो माता है और मैं बीजस्थाप
- 18.55अ. 18
Devoted love turns understanding into immediate nearness.
उस पराभक्तिसे मेरेको, मैं जितना हूँ और जो हूँ इसको तत्त्वसे जान लेता है तथा मेरेको तत्त्वसे जानकर फिर तत्काल मेरेमें प्
- 18.65अ. 18
Wholehearted devotion becomes the shortest path home.
तू मेरा भक्त हो जा, मेरेमें मनवाला हो जा, मेरा पूजन करनेवाला हो जा और मेरेको नमस्कार कर । ऐसा करनेसे तू मेरेको ही प्राप
- 18.66अ. 18
Total refuge ends the burden of fear.
सम्पूर्ण धर्मोंका आश्रय छोड़कर तू केवल मेरी शरणमें आ जा । मैं तुझे सम्पूर्ण पापोंसे मुक्त कर दूँगा, चिन्ता मत कर ॥
- 18.68अ. 18
Devotion deepens when sacred truth is passed on.
मेरेमें पराभक्ति करके जो इस परम गोपनीय संवादगीताग्रन्थ को मेरे भक्तोंमें कहेगा, वह मुझे ही प्राप्त होगा इसमें कोई सन्दे
- 18.77अ. 18
Remembering Krishna's vast form still overwhelms the mind with wonder.
हे राजन् भगवान् श्रीकृष्णके उस अत्यन्त अद्भुत विराट्रूपको याद करकरके मेरेको बड़ा भारी आश्चर्य हो रहा है और मैं बारबार ह