भगवद् गीता में Prakriti
प्रकृति वह समस्त प्रकट सत्ता है — जो कुछ भी उठता, बदलता और मिटता है। गीता सिखाती है कि आप जो देखते, अनुभव करते और सोचते हैं वह सब प्रकृति से उठता है। और पुरुष — चेतन साक्षी — उससे अलग है। यही पहचान मुक्ति का आरम्भ है।
कार्यते ह्यवशः कर्म सर्वः प्रकृतिजैर्गुणैः ॥
अहङ्कारविमूढात्मा कर्ताऽहमिति मन्यते ॥
प्रकृतिं यान्ति भूतानि निग्रहः किं करिष्यति ॥
- 4.6अ. 4
The unborn can still appear without ceasing to be free.
मैं अजन्मा और अविनाशीस्वरूप होते हुए भी तथा सम्पूर्ण प्राणियोंका ईश्वर होते हुए भी अपनी प्रकृतिको अधीन करके अपनी योगमाया
- 5.14अ. 5
What looks like personal control is nature moving through form.
परमेश्वर मनुष्योंके न कर्तापनकी, न कर्मोंकी और न कर्मफलके साथ संयोगकी रचना करते हैं किन्तु स्वभाव ही बरत रहा है ॥
- 7.4अ. 7
What changes is not the whole of what you are.
पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश ये पञ्चमहाभूत और मन, बुद्धि तथा अहंकार यह आठ प्रकारके भेदोंवाली मेरी अपरा प्रकृति है । हे
- 7.5अ. 7
What sustains the world is subtler than what the senses first show.
पृथ्वी, जल, तेज, वायु, आकाश ये पञ्चमहाभूत और मन, बुद्धि तथा अहंकार यह आठ प्रकारके भेदोंवाली मेरी अपरा प्रकृति है । हे
- 7.6अ. 7
Everything that appears rises from one source and returns there.
अपरा और परा इन दोनों प्रकृतियोंके संयोगसे ही सम्पूर्ण प्राणी उत्पन्न होते हैं, ऐसा तुम समझो । मैं सम्पूर्ण जगत् का प्र
- 7.9अ. 7
The sacred is already inside nature, vitality, and discipline.
पृथ्वीमें पवित्र गन्ध मैं हूँ, और अग्निमें तेज मैं हूँ, तथा सम्पूर्ण प्राणियोंमें जीवनीशक्ति मैं हूँ और तपस्वियोंमें तपस
- 7.20अ. 7
Desire clouds judgment and sends the mind toward smaller refuges.
उनउन कामनाओंसे जिनका ज्ञान अपहृत हो गया है, ऐसे वे मनुष्य अपनीअपनी प्रकृतिसे नियन्त्रित होकर देवताओंके उनउन नियमोंको धार
- 8.19अ. 8
All formed things return and rise again under nature’s compulsion.
हे पार्थ वही यह प्राणिसमुदाय उत्पन्न होहोकर प्रकृतिके परवश हुआ ब्रह्माके दिनके समय उत्पन्न होता है और ब्रह्माकी रात्रिक
- 9.7अ. 9
What seems like ending is only a return before another beginning.
हे कुन्तीनन्दन कल्पोंका क्षय होनेपर सम्पूर्ण प्राणी मेरी प्रकृतिको प्राप्त होते हैं और कल्पोंके आदिमें मैं फिर उनकी रचन
- 9.8अ. 9
Life unfolds through a power larger than individual will.
प्रकृतिके वशमें होनेसे परतन्त्र हुए इस सम्पूर्ण प्राणिसमुदायको मैं कल्पोंके आदिमें अपनी प्रकृतिको वशमें करके बारबार रचता
- 9.9अ. 9
Action can continue without leaving a chain behind.
हे धनञ्जय उन सृष्टिरचना आदि कर्मोंमें अनासक्त और उदासीनकी तरह रहते हुए मेरेको वे कर्म नहीं बाँधते ॥
- 9.10अ. 9
Change is not chaotic; it unfolds within a higher order.
प्रकृति मेरी अध्यक्षतामें सम्पूर्ण चराचर जगत् को रचती है । हे कुन्तीनन्दन इसी हेतुसे जगत् का विविध प्रकारसे परिवर्तन ह
- 13.1अ. 13
Real knowing starts by separating the seen from the seer.
श्रीभगवान् बोलेहे कुन्तीपुत्र अर्जुन यहरूपसे कहे जानेवाले शरीरको क्षेत्र कहते हैं और इस क्षेत्रको जो जानता है, उसको ज्ञ
- 13.20अ. 13
Change belongs to nature; awareness is not caught in it.
प्रकृति और पुरुष दोनोंको ही तुम अनादि समझो और विकारों तथा गुणोंको भी प्रकृतिसे ही उत्पन्न समझो । कार्य और करणके द्वारा
- 13.21अ. 13
Action belongs to nature; experience belongs to the one who knows.
प्रकृति और पुरुष दोनोंको ही तुम अनादि समझो और विकारों तथा गुणोंको भी प्रकृतिसे ही उत्पन्न समझो । कार्य और करणके द्वारा
- 13.22अ. 13
Attachment to changing qualities keeps the cycle of birth going.
प्रकृतिमें स्थित पुरुष ही प्रकृतिजन्य गुणोंका भोक्ता बनता है और गुणोंका सङ्ग ही उसके ऊँचनीच योनियोंमें जन्म लेनेका कारण
- 13.23अ. 13
Identity is borrowed from the body; the true self stands beyond it.
यह पुरुष प्रकृतिशरीर के साथ सम्बन्ध रखनेसे उपद्रष्टा, उसके साथ मिलकर सम्मति, अनुमति देनेसे अनुमन्ता, अपनेको उसका भरणपोषण
- 13.24अ. 13
Clear seeing frees you while life still continues.
इस प्रकार पुरुषको और गुणोंके सहित प्रकृतिको जो मनुष्य अलगअलग जानता है, वह सब तरहका बर्ताव करता हुआ भी फिर जन्म नहीं लेता
- 13.30अ. 13
Freedom begins when you stop claiming every action as yours.
जो सम्पूर्ण क्रियाओंको सब प्रकारसे प्रकृतिके द्वारा ही की जाती हुई देखता है और अपनेआपको अकर्ता देखता अनुभव करता है, वही
- 13.35अ. 13
Clear seeing separates you from what changes and opens the way beyond it.
इस प्रकार जो ज्ञानरूपी नेत्रसे क्षेत्र और क्षेत्रज्ञके अन्तरविभाग को तथा कार्यकारणसहित प्रकृतिसे स्वयंको अलग जानते हैं,
- 14.3अ. 14
All birth comes from a source beyond personal control.
हे भरतवंशोद्भव अर्जुन मेरी मूल प्रकृति तो उत्पत्तिस्थान है और मैं उसमें जीवरूप गर्भका स्थापन करता हूँ । उससे सम्पूर्ण
- 14.4अ. 14
All forms arise from one source, and the divine gives them life.
हे कुन्तीनन्दन सम्पूर्ण योनियोंमें प्राणियोंके जितने शरीर पैदा होते हैं, उन सबकी मूल प्रकृति तो माता है और मैं बीजस्थाप
- 14.5अ. 14
Nature's three forces keep the changeless one identified with the body.
हे महाबाहो प्रकृतिसे उत्पन्न होनेवाले सत्त्व, रज और तम ये तीनों गुण अविनाशी देहीको देहमें बाँध देते हैं ॥
- 14.6अ. 14
Even clarity becomes bondage when you cling to its pleasure.
हे पापरहित अर्जुन उन गुणोंमें सत्त्वगुण निर्मल स्वच्छ होनेके कारण प्रकाशक और निर्विकार है । वह सुख और ज्ञानकी आसक्तिसे
- 14.7अ. 14
Craving turns action into a chain.
हे कुन्तीनन्दन तृष्णा और आसक्तिको पैदा करनेवाले रजोगुणको तुम रागस्वरूप समझो । वह कर्मोंकी आसक्तिसे शरीरधारीको बाँधता ह
- 14.19अ. 14
Freedom begins when you stop mistaking qualities for a personal doer.
जब विवेकी विचारकुशल मनुष्य तीनों गुणोंके सिवाय अन्य किसीको कर्ता नहीं देखता और अपनेको गुणोंसे पर अनुभव करता है, तब वह मे
- 15.7अ. 15
What is eternal gets pulled around by what changes.
इस संसारमें जीव बना हुआ आत्मा मेरा ही सनातन अंश है परन्तु वह प्रकृतिमें स्थित मन और पाँचों इन्द्रियोंको आकर्षित करता है
- 18.40अ. 18
No state is free from the three qualities of nature.
पृथ्वीमें या स्वर्गमें अथवा देवताओंमें तथा इनके सिवाय और कहीं भी वह ऐसी कोई वस्तु नहीं है, जो प्रकृतिसे उत्पन्न इन तीनों