विषय · 23 श्लोक

भगवद् गीता में Equanimity

भगवद् गीता के 23 श्लोक जो equanimity पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।

चुने हुए 3 श्लोक — पूरा पाठ + संस्कृत ऑडियो
भगवद् गीता 2.14Speaker: Krishna
मात्रास्पर्शास्तु कौन्तेय शीतोष्णसुखदुःखदाः
आगमापायिनोऽनित्यास्तांस्तितिक्षस्व भारत
अर्थ · हिन्दी
हे कुन्तीनन्दन इन्द्रियोंके जो विषय जड पदार्थ हैं, वो तो शीत अनुकूलता और उष्ण प्रतिकूलता के द्वारा सुख और दुःख देनेवाले हैं तथा आनेजानेवाले और अनित्य हैं । हे भरतवंशोद्भव अर्जुन उनको तुम सहन करो ॥
सार
Pleasure and pain from the senses are temporary. They come and go, so you should learn to bear them without being shaken.
Passing sensations lose power when you stop treating them as permanent.
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भगवद् गीता 2.15Speaker: Krishna
यं हि व्यथयन्त्येते पुरुषं पुरुषर्षभ
समदुःखसुखं धीरं सोऽमृतत्वाय कल्पते
अर्थ · हिन्दी
कारण कि हे पुरुषोंमें श्रेष्ठ अर्जुन सुखदुःखमें सम रहनेवाले जिस धीर मनुष्यको ये मात्रास्पर्श पदार्थ व्यथित सुखीदुःखी नहीं कर पाते, वह अमर होनेमें समर्थ हो जाता है अर्थात् वह अमर हो जाता है ॥
सार
A steady person who stays even through pleasure and pain is not thrown off by changing experiences and becomes ready for inner freedom.
Freedom begins where pain and pleasure stop controlling you.
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भगवद् गीता 2.38Speaker: Krishna
सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि
अर्थ · हिन्दी
जयपराजय, लाभहानि और सुखदुःखको समान करके फिर युद्धमें लग जा । इस प्रकार युद्ध करनेसे तू पापको प्राप्त नहीं होगा ॥
सार
Stay steady through pleasure and pain, success and failure. Act from that balance, and your action will not bind you.
Equanimity frees action from the stain of panic and craving.
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