भगवद् गीता में Jnana
भगवद् गीता के 24 श्लोक जो jnana पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।
प्रकृतिं स्वामधिष्ठाय संभवाम्यात्ममायया ॥
आत्मसंयमयोगाग्नौ जुह्वति ज्ञानदीपिते ॥
उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः ॥
- 4.35अ. 4
Knowing deeply ends confusion by revealing one reality in all beings.
जिस तत्त्वज्ञान का अनुभव करनेके बाद तू फिर इस प्रकार मोहको नहीं प्राप्त होगा, और हे अर्जुन जिस तत्त्वज्ञान से तू सम्पूर
- 4.36अ. 4
Clear understanding can carry even the heaviest past across.
अगर तू सब पापियोंसे भी अधिक पापी है, तो भी तू ज्ञानरूपी नौकाके द्वारा निःसन्देह सम्पूर्ण पापसमुद्रसे अच्छी तरह तर जायगा
- 4.38अ. 4
Nothing purifies like knowledge, and yoga ripens it from within.
इस मनुष्यलोकमें ज्ञानके समान पवित्र करनेवाला निःसन्देह दूसरा कोई साधन नहीं है । जिसका योग भलीभाँति सिद्ध हो गया है, वह
- 4.39अ. 4
Trust, discipline, and restraint make room for peace.
जो जितेन्द्रिय तथा साधनपरायण है, ऐसा श्रद्धावान् मनुष्य ज्ञानको प्राप्त होता है और ज्ञानको प्राप्त होकर वह तत्काल परम शा
- 5.15अ. 5
Ignorance, not action, is what keeps beings confused.
सर्वव्यापी परमात्मा न किसीके पापकर्मको और न शुभकर्मको ही ग्रहण करता है किन्तु अज्ञानसे ज्ञान ढका हुआ है, उसीसे सब जीव मो
- 5.17अ. 5
Complete alignment with the supreme reality ends the cycle of return.
जिनकी बुद्धि तदाकार हो रही है, जिनका मन तदाकार हो रहा है, जिनकी स्थिति परमात्मतत्वमें है, ऐसे परमात्मपरायण साधक ज्ञानके
- 6.46अ. 6
Inner mastery outranks every outer path.
सकामभाववाले तपस्वियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है, ज्ञानियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है और कर्मियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है ऐसा मेरा मत
- 7.2अ. 7
Real knowing leaves no unfinished hunger for more.
तेरे लिये मैं विज्ञानसहित ज्ञान सम्पूर्णतासे कहूँगा, जिसको जाननेके बाद फिर यहाँ कुछ भी जानना बाकी नहीं रहेगा ॥
- 7.17अ. 7
Deep knowing and devoted love become a mutual bond.
उन चार भक्तोंमें मेरेमें निरन्तर लगा हुआ, अनन्यभक्तिवाला ज्ञानी अर्थात् प्रेमी भक्त श्रेष्ठ है क्योंकि ज्ञानी भक्तको मैं
- 7.30अ. 7
Complete understanding remains steady even at the moment of departure.
जो मनुष्य अधिभूत, अधिदैव और अधियज्ञके सहित मुझे जानते हैं, वे युक्तचेता मनुष्य अन्तकालमें भी मुझे ही जानते हैं अर्थात् प
- 9.2अ. 9
The highest truth is both profound and simple to live.
यह सम्पूर्ण विद्याओंका और सम्पूर्ण गोपनीयोंका राजा है । यह अति पवित्र तथा अतिश्रेष्ठ है और इसका फल भी प्रत्यक्ष है । य
- 10.11अ. 10
Compassion becomes knowledge that burns away inner darkness.
उन भक्तोंपर कृपा करनेके लिये ही उनके स्वरूप होनेपन में रहनेवाला मैं उनके अज्ञानजन्य अन्धकारको देदीप्यमान ज्ञानरूप दीपकके
- 10.38अ. 10
True power is measured by restraint, silence, and clear understanding.
दमन करनेवालोंमें दण्डनीति और विजय चाहनेवालोंमें नीति मैं हूँ । गोपनीय भावोंमें मौन और ज्ञानवानोंमें ज्ञान मैं हूँ ॥
- 13.1अ. 13
Real knowing starts by separating the seen from the seer.
श्रीभगवान् बोलेहे कुन्तीपुत्र अर्जुन यहरूपसे कहे जानेवाले शरीरको क्षेत्र कहते हैं और इस क्षेत्रको जो जानता है, उसको ज्ञ
- 13.18अ. 13
What illumines everything is already nearest to you.
वह परमात्मा सम्पूर्ण ज्योतियोंका भी ज्योति और अज्ञानसे अत्यन्त परे कहा गया है । वह ज्ञानस्वरूप, जाननेयोग्य, ज्ञानसाधनसम
- 13.19अ. 13
Clear understanding becomes transformation when devotion receives it.
इस प्रकार क्षेत्र, ज्ञान और ज्ञेयको संक्षेपसे कहा गया । मेरा भक्त इसको तत्त्वसे जानकर मेरे भावको प्राप्त हो जाता है ॥
- 15.20अ. 15
Secret knowledge makes a person complete.
हे निष्पाप अर्जुन इस प्रकार यह अत्यन्त गोपनीय शास्त्र मेरे द्वारा कहा गया है । हे भरतवंशी अर्जुन इसको जानकर मनुष्य ज्
- 18.18अ. 18
Action is a system, not a single ego doing everything.
ज्ञान, ज्ञेय और परिज्ञाता इन तीनोंसे कर्मप्रेरणा होती है तथा करण, कर्म और कर्ता इन तीनोंसे कर्मसंग्रह होता है ॥
- 18.19अ. 18
Every action, knower, and deed carries the mark of a quality.
गुणसंख्यान गुणोंके सम्बन्धसे प्रत्येक पदार्थके भिन्नभिन्न भेदोंकी गणना करनेवाले शास्त्रमें गुणोंके भेदसे ज्ञान और कर्म त
- 18.20अ. 18
True understanding sees one undivided reality inside every divided form.
जिस ज्ञानके द्वारा साधक सम्पूर्ण विभक्त प्राणियोंमें विभागरहित एक अविनाशी भावसत्ता को देखता है, उस ज्ञानको तुम सात्त्विक
- 18.50अ. 18
Knowledge has a highest point: direct arrival, not endless thinking.
हे कौन्तेय सिद्धिअन्तःकरणकी शुद्धि को प्राप्त हुआ साधक ब्रह्मको, जो कि ज्ञानकी परा निष्ठा है, जिस प्रकारसे प्राप्त होता