दैवासुर संपद् विभाग योग
दो प्रकृतियाँ, दैवी और आसुरी। ये दूर के पात्र नहीं, हर मनुष्य के भीतर की प्रवृत्तियाँ हैं।
सभी 24 श्लोक नीचे।
Wisdom translation, edited by Ankur Shukla. Commentary AI-drafted, human-reviewed. Reviewed June 2026. Methodology →

“श्रीभगवान् बोले भयका सर्वथा अभाव अन्तःकरणकी शुद्धि ज्ञानके लिये योगमें दृढ़ स्थिति सात्त्विक दान इन्द्रियोंका दमन यज्ञ स्वाध्याय कर्तव्यपालनके लिये कष्ट सहना शरीरमनवाणीकी सरलता ॥”पूरा श्लोक 16.1 पढ़ें →सभी श्लोक
- 16.1अ. 16
Right action starts with disciplined character.
श्रीभगवान् बोले भयका सर्वथा अभाव अन्तःकरणकी शुद्धि ज्ञानके लिये योगमें दृढ़ स्थिति सात्त्विक दान इन्द्रियोंका दमन यज्ञ …
- 16.2अ. 16
A noble character is proven by how gently it reacts.
अहिंसा, सत्यभाषण क्रोध न करना संसारकी कामनाका त्याग अन्तःकरणमें रागद्वेषजनित हलचलका न होना चुगली न करना प्राणियोंपर दया …
- 16.3अ. 16
True strength looks like forgiveness, steadiness, and no need to dominate.
तेज प्रभाव, क्षमा, धैर्य, शरीरकी शुद्धि, वैरभावका न रहना और मानको न चाहना, हे भरतवंशी अर्जुन ये सभी दैवी सम्पदाको प्राप…
- 16.4अ. 16
False pride and cruelty reveal a nature already turned away from wisdom.
हे पृथानन्दन दम्भ करना, घमण्ड करना, अभिमान करना, क्रोध करना, कठोरता रखना और अविवेकका होना भी ये सभी आसुरीसम्पदाको प्रा…
- 16.5अ. 16
Freedom grows from one kind of character; bondage grows from another.
दैवीसम्पत्ति मुक्तिके लिये और आसुरीसम्पत्ति बन्धनके लिये है । हे पाण्डव तुम दैवीसम्पत्तिको प्राप्त हुए हो, इसलिये तुम्ह…
- 16.6अ. 16
Human life divides by inner orientation, not by appearance.
इस लोकमें दो तरहके प्राणियोंकी सृष्टि है दैवी और आसुरी । दैवीका तो मैंने विस्तारसे वर्णन कर दिया, अब हे पार्थ तुम मेर…
- 16.7अ. 16
Without discernment, conduct collapses and truth disappears.
आसुरी प्रकृतिवाले मनुष्य प्रवृत्ति और निवृत्तिको नहीं जानते और उनमें न बाह्यशुद्धि, न श्रेष्ठ आचरण तथा न सत्यपालन ही होत…
- 16.8अ. 16
Cynical explanations of life can become a permission slip for harmful action.
वे कहा करते हैं कि संसार असत्य, अप्रतिष्ठित और बिना ईश्वरके अपनेआप केवल स्त्रीपुरुषके संयोगसे पैदा हुआ है । इसलिये काम …
- 16.9अ. 16
False vision turns strength into destruction.
उपर्युक्त नास्तिक दृष्टिका आश्रय लेनेवाले जो मनुष्य अपने नित्य स्वरूपको नहीं मानते, जिनकी बुद्धि तुच्छ है, जो उग्रकर्मा …
- 16.10अ. 16
Endless wanting turns the mind into a home for delusion.
कभी पूरी न होनेवाली कामनाओंका आश्रय लेकर दम्भ, अभिमान और मदमें चूर रहनेवाले तथा अपवित्र व्रत धारण करनेवाले मनुष्य मोहके …
- 16.11अ. 16
Endless wanting turns life into a tunnel with no horizon.
वे मृत्युपर्यन्त रहनेवाली अपार चिन्ताओंका आश्रय लेनेवाले, पदार्थोंका संग्रह और उनका भोग करनेमें ही लगे रहनेवाले और जो कु…
- 16.12अ. 16
Desire and anger turn ambition into injustice.
वे आशाकी सैकड़ों फाँसियोंसे बँधे हुए मनुष्य कामक्रोधके परायण होकर पदार्थोंका भोग करनेके लिये अन्यायपूर्वक धनसंचय करनेकी …
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- 16.13अ. 16
Possession feeds appetite when the mind mistakes gain for completion.
इतनी वस्तुएँ तो हमने आज प्राप्त कर लीं और अब इस मनोरथको प्राप्त पूरा कर लेंगे । ,इतना धन तो हमारे पास है ही, इतना धन फिर…
- 16.14अ. 16
Ego turns achievement into delusion and mistakes possession for mastery.
वह शत्रु तो हमारे द्वारा मारा गया और उन दूसरे शत्रुओंको भी हम मार डालेंगे । हम सर्वसमर्थ हैं । हमारे पास भोगसामग्री बह…
- 16.15अ. 16
Pride turns abundance into delusion and makes more wanting feel justified.
हम धनवान् हैं, बहुतसे मनुष्य हमारे पास हैं, हमारे समान और कौन है हम खूब यज्ञ करेंगे, दान देंगे और मौज करेंगे इस तरह वे …
- 16.16अ. 16
Desire scatters the mind, and confusion turns that scattering into a fall.
कामनाओंके कारण तरहतरहसे भ्रमित चित्तवाले, मोहजालमें अच्छी तरहसे फँसे हुए तथा पदार्थों और भोगोंमें अत्यन्त आसक्त रहनेवाले…
- 16.17अ. 16
Pride can hollow out sacred action until only appearance remains.
अपनेको सबसे अधिक पूज्य माननेवाले, अकड़ रखनेवाले तथा धन और मानके मदमें चूर रहनेवाले वे मनुष्य दम्भसे अविधिपूर्वक नाममात्र…
- 16.18अ. 16
Ego makes you fight the divine presence you carry yourself.
वे अहङ्कार, हठ, घमण्ड, कामना और क्रोधका आश्रय लेनेवाले मनुष्य अपने और दूसरोंके शरीरमें रहनेवाले मुझ अन्तर्यामीके साथ द्व…
- 16.19अ. 16
Repeated hatred drives a person into worse and worse forms of existence.
उन द्वेष करनेवाले, क्रूर स्वभाववाले और संसारमें महान् नीच, अपवित्र मनुष्योंको मैं बारबार आसुरी योनियोंमें गिराता ही रहता…
- 16.20अ. 16
Repeated delusion keeps pulling a person farther from the divine.
हे कुन्तीनन्दन वे मूढ मनुष्य मेरेको प्राप्त न करके ही जन्मजन्मान्तरमें आसुरी योनिको प्राप्त होते हैं, फिर उससे भी अधिक …
- 16.21अ. 16
Three inner forces open the way to ruin; dropping them protects the self.
काम, क्रोध और लोभ ये तीन प्रकारके नरकके दरवाजे जीवात्माका पतन करनेवाले हैं, इसलिये इन तीनोंका त्याग कर देना चाहिये ॥
- 16.22अ. 16
Freedom from the three dark impulses opens the way to your highest good.
हे कुन्तीनन्दन इन नरकके तीनों दरवाजोंसे रहित हुआ जो मनुष्य अपने कल्याणका आचरण करता है, वह परमगतिको प्राप्त हो जाता है ॥
- 16.23अ. 16
Impulse cannot deliver what it promises.
जो मनुष्य शास्त्रविधिको छोड़कर अपनी इच्छासे मनमाना आचरण करता है, वह न सिद्धिअन्तःकरणकी शुद्धि को, न सुखको और न परमगतिको …
- 16.24अ. 16
Impulse cannot judge action; a higher standard must.
अतः तेरे लिये कर्तव्यअकर्तव्यकी व्यवस्थामें शास्त्र ही प्रमाण है ऐसा जानकर तू इस लोकमें शास्त्रविधिसे नियत कर्तव्य कर्म…