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विषय · 23 श्लोक

भगवद् गीता में समर्पण

गीता समर्पण को हर कर्म और उसका फल ईश्वर को सौंपना बताती है; कृष्ण का अंतिम आह्वान है कि केवल उनकी शरण लो।

गीता के 23 श्लोक जो समर्पण पर हैं, सभी अध्यायों से, क्रम में।

चुने हुए 3 श्लोक: पूरा पाठ और संस्कृत ऑडियो
भगवद् गीता 5.29
भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम् ।
सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति ॥
हिन्दी अर्थ
भक्त मुझे सब यज्ञों और तपोंका भोक्ता, सम्पूर्ण लोकोंका महान् ईश्वर तथा सम्पूर्ण प्राणियोंका सुहृद् स्वार्थरहित दयालु और प्रेमी जानकर शान्तिको प्राप्त हो जाता है ॥
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भगवद् गीता 9.34
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु ।
मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायणः ॥
हिन्दी अर्थ
तू मेरा भक्त हो जा, मेरेमें मनवाला हो जा, मेरा पूजन करनेवाला हो जा और मेरेको नमस्कार कर । इस प्रकार मेरे साथ अपनेआपको लगाकर, मेरे परायण हुआ तू मेरेको ही प्राप्त होगा । , ॥
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भगवद् गीता 11.17
किरीटिनं गदिनं चक्रिणं चतेजोराशिं सर्वतोदीप्तिमन्तम् ।
पश्यामि त्वां दुर्निरीक्ष्यं समन्ताद्दीप्तानलार्कद्युतिमप्रमेयम् ॥
हिन्दी अर्थ
मैं आपको किरीट, गदा, चक्र तथा शङ्ख और पद्म धारण किये हुए देख रहा हूँ । आपको तेजकी राशि, सब ओर प्रकाश करनेवाले, देदीप्यमान अग्नि तथा सूर्यके समान कान्तिवाले, नेत्रोंके द्वारा कठिनतासे देखे जानेयोग्य और सब तरफसे अप्रमेयस्वरूप देख रहा हूँ ॥
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