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विषय · 16 श्लोक

भगवद् गीता में संजय

संजय गीता के कथावाचक हैं; व्यास की कृपा से वे यह संवाद देखते हैं और अंधे राजा धृतराष्ट्र को सुनाते हैं।

संजय साक्षी हैं। उन्हीं के माध्यम से अंधे राजा धृतराष्ट्र वह संवाद सुनते हैं जो वे देख नहीं सके।

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भगवद् गीता 1.1
धृतराष्ट्र उवाचधर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः ।
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ॥
हिन्दी अर्थ
धृतराष्ट्र बोले हे संजय धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से इकट्ठे हुए मेरेे और पाण्डु के पुत्रों ने भी क्या किया ॥
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भगवद् गीता 1.5
धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान् ।
पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गवः ॥
हिन्दी अर्थ
यहाँ पाण्डवों की सेना में बड़ेबड़े शूरवीर हैं, जिनके बहुत बड़ेबड़े धनुष हैं तथा जो युद्ध में भीम और अर्जुनके समान हैं । उनमें युयुधान सात्यकि, राजा विराट और महारथी द्रुपद भी हैं । धृष्टकेतु और चेकितान तथा पराक्रमी काशिराज भी हैं । पुरुजित् और कुन्तिभोजये दोनों भाई तथा मनुष्योंमें श्रेष्ठ शैब्य भी हैं । पराक्रमी युधामन्यु और पराक्रमी उत्तमौजा भी हैं । सुभद्रापुत्र अभिमन्यु और द्रौपदी के पाँचों पुत्र भी हैं । ये सबकेसब महारथी हैं ॥
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भगवद् गीता 1.16
अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः ।
नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ ॥
हिन्दी अर्थ
कुन्तीपुत्र राजा युधिष्ठिर ने अनन्तविजय नामक शंख बजाया तथा नकुल और सहदेव ने सुघोष और मणिपुष्पक नामक शंख बजाये ॥
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