विश्वरूप दर्शन योग · श्लोक 10

भगवद् गीता 11.10

The divine form cannot be held inside one human image.

अनेकवक्त्रनयनमनेकाद्भुतदर्शनम् । अनेकदिव्याभरणं दिव्यानेकोद्यतायुधम् ॥
हिन्दी अनुवाद
जिसके अनेक मुख और नेत्र हैं, अनेक तहरके अद्भुत दर्शन हैं, अनेक दिव्य आभूषण हैं, हाथोंमें उठाये हुए अनेक दिव्य आयुध हैं तथा जिनके गलेमें दिव्य मालाएँ हैं, जो दिव्य वस्त्र पहने हुए हैं, जिनके ललाट तथा शरीरपर दिव्य चन्दन, कुंकुम आदि लगा हुआ है, ऐसे सम्पूर्ण आश्चर्यमय, अनन्तरूपवाले तथा चारों तरफ मुखवाले देवअपने दिव्य स्वरूप को भगवान् ने दिखाया ॥
English
With many mouths and eyes, with countless wondrous forms, adorned with many divine ornaments and many uplifted divine weapons.
विषय:vishwarupacosmic-formdivine-vision
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