आज का श्लोक · शनिवार, 7 नवंबर 2026

भगवद् गीता 11.8

"Ordinary sight cannot hold the infinite; grace must widen the eye."

न तु मां शक्यसे द्रष्टुमनेनैव स्वचक्षुषा ।
दिव्यं ददामि ते चक्षुः पश्य मे योगमैश्वरम् ॥
हिन्दी अनुवाद
परन्तु तू अपनी इस आँखसे अर्थात् चर्मचक्षुसे मेरेको देख ही नहीं सकता, इसलिये मैं तुझे दिव्य चक्षु देता हूँ, जिससे तू मेरी ईश्वरसम्बन्धी सामर्थ्यको देख ॥
अंग्रेज़ी अनुवाद
You cannot see me with these ordinary eyes. I give you divine sight, so you may behold my supreme power.
विषय:Vishwarupa
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