भगवद् गीता में दुर्योधन
दुर्योधन कौरव राजकुमार है जो पाण्डवों के विरुद्ध सेना का नेतृत्व करता है; अध्याय 1 में वह गुरु द्रोण से दोनों सेनाओं की बात करता है।
गीता के 12 श्लोक जो दुर्योधन पर हैं, सभी अध्यायों से, क्रम में।
आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत् ॥
व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता ॥
युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः ॥
- 1.6अ. 1
युधामन्युश्च विक्रान्त उत्तमौजाश्च वीर्यवान् ।
यहाँ पाण्डवों की सेना में बड़ेबड़े शूरवीर हैं, जिनके बहुत बड़ेबड़े धनुष हैं तथा जो युद्ध में भीम और अर्जुनके समान हैं ।
- 1.7अ. 1
अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम ।
हे द्विजोत्तम हमारे पक्ष में भी जो मुख्य हैं, उनपर भी आप ध्यान दीजिये ।
- 1.8अ. 1
भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जयः ।
आप द्रोणाचार्य और पितामह भीष्म तथा कर्ण और संग्रामविजयी कृपाचार्य तथा वैसे ही अश्वत्थामा, विकर्ण और सोमदत्त का पुत्र भूरिश्रवा ॥
- 1.9अ. 1
अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः ।
इनके अतिरिक्त बहुतसे शूरवीर हैं, जिन्होंने मेरे लिये अपने जीने की इच्छा का भी त्याग कर दिया है और जो अनेक प्रकार के शस्त्रअस्त्रों को…
- 1.10अ. 1
अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम् ।
वह हमारी सेना पाण्डवों पर विजय करने में अपर्याप्त है, असमर्थ है क्योंकि उसके संरक्षक उभयपक्षपाती भीष्म हैं ।
- 1.11अ. 1
अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिताः ।
आप सबकेसब लोग सभी मोर्चों पर अपनीअपनी जगह दृढ़ता से स्थित रहते हुए ही पितामह भीष्म की चारों ओर से रक्षा करें ॥
- 1.12अ. 1
तस्य संजनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः ।
दुर्योधन के हृदय में हर्ष उत्पन्न करते हुए कुरुवृद्ध प्रभावशाली पितामह भीष्म ने सिंह के समान गरज कर जोर से शंख बजाया ॥
- 1.19अ. 1
स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत् ।
पाण्डवसेना के शंखों के उस भयंकर शब्द ने आकाश और पृथ्वी को भी गुँजाते हुए अन्यायपूर्वक राज्य हड़पनेवाले दुर्योधन आदि के हृदय विदीर्ण कर दिये…
- 1.23अ. 1
योत्स्यमानानवेक्षेऽहं य एतेऽत्र समागताः ।
दुष्टबुद्धि दुर्योधन का युद्ध में प्रिय करने की इच्छावाले जो ये राजालोग इस सेना में आये हुए हैं, युद्ध करने को उतावले हुए इन सबको मैं देख…