विषय · 20 श्लोक

भगवद् गीता में Attachment

भगवद् गीता के 20 श्लोक जो attachment पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।

चुने हुए 3 श्लोक — पूरा पाठ + संस्कृत ऑडियो
भगवद् गीता 2.8Speaker: Arjuna
हि प्रपश्यामि ममापनुद्याद्यच्छोकमुच्छोषणमिन्द्रियाणाम्
अवाप्य भूमावसपत्नमृद्धम्राज्यं सुराणामपि चाधिपत्यम्
अर्थ · हिन्दी
पृथ्वीपर धनधान्यसमृद्ध और शत्रुरहितराज्य तथा स्वर्गमें देवताओंका आधिपत्य मिल जाय तो भी इन्द्रियोंको सुखानेवाला मेरा जो शोक है, वह दूर हो जाय ऐसा मैं नहीं देखता हूँ ॥
सार
Arjuna says that even the greatest possible power and wealth would not remove his grief. His mind is so overwhelmed that nothing outside can fix it.
No outer victory can cure an inner collapse.
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भगवद् गीता 2.44Speaker: Krishna
भोगैश्वर्यप्रसक्तानां तयापहृतचेतसाम्
व्यवसायात्मिका बुद्धिः समाधौ विधीयते
अर्थ · हिन्दी
उस पुष्पित वाणीसे जिसका अन्तःकरण हर लिया गया है अर्थात् भोगोंकी तरफ खिंच गया है और जो भोग तथा ऐश्वर्यमें अत्यन्त आसक्त हैं, उन मनुष्योंकी परमात्मामें निश्चयात्मिका बुद्धि नहीं होती ॥
सार
People who are pulled toward pleasure and power lose clear judgment. Their mind cannot settle into steady focus on the supreme reality.
Craving scatters the mind before wisdom can settle.
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भगवद् गीता 2.47Speaker: Krishna
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि
अर्थ · हिन्दी
कर्तव्यकर्म करनेमें ही तेरा अधिकार है, फलोंमें कभी नहीं । अतः तू कर्मफलका हेतु भी मत बन और तेरी अकर्मण्यतामें भी आसक्ति न हो ॥
सार
You control your action, not what it produces. Do your duty without chasing the reward or getting attached to doing nothing.
Action belongs to you; the result does not.
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