कार्यमित्येव यत्कर्म नियतं क्रियतेऽर्जुन । सङ्गं त्यक्त्वा फलं चैव स त्यागः सात्त्विको मतः ॥
हिन्दी अनुवाद
हे अर्जुन केवल कर्तव्यमात्र करना है ऐसा समझकर जो नियत कर्म आसक्ति और फलका त्याग करके किया जाता है, वही सात्त्विक त्याग माना गया है ॥
English
Arjuna, when fixed duty is done as only duty, without clinging to results, that renunciation is called sattvic.