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विषय · 11 श्लोक

भगवद् गीता में सांख्य

गीता में सांख्य विवेकपूर्ण ज्ञान का मार्ग है: आत्मा को शरीर और प्रकृति से अलग समझना।

गीता के 11 श्लोक जो सांख्य पर हैं, सभी अध्यायों से, क्रम में।

चुने हुए 3 श्लोक: पूरा पाठ और संस्कृत ऑडियो
भगवद् गीता 2.13
देहिनोऽस्मिन्यथा देहे कौमारं यौवनं जरा ।
तथा देहान्तरप्राप्तिर्धीरस्तत्र न मुह्यति ॥
हिन्दी अर्थ
देहधारीके इस मनुष्यशरीरमें जैसे बालकपन, जवानी और वृद्धावस्था होती है, ऐसे ही देहान्तरकी प्राप्ति होती है । उस विषयमें धीर मनुष्य मोहित नहीं होता ॥
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भगवद् गीता 2.23
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः ।
न चैनं क्लेदयन्त्यापो न शोषयति मारुतः ॥
हिन्दी अर्थ
शस्त्र इस शरीरीको काट नहीं सकते, अग्नि इसको जला नहीं सकती, जल इसको गीला नहीं कर सकता और वायु इसको सुखा नहीं सकती ॥
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भगवद् गीता 2.27
जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च ।
तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि ॥
हिन्दी अर्थ
क्योंकि पैदा हुएकी जरूर मृत्यु होगी और मरे हुएका जरूर जन्म होगा । इस जन्ममरणरूप परिवर्तन के प्रवाह का परिहार अर्थात् निवारण नहीं हो सकता । अतः इस विषयमें तुम्हें शोक नहीं करना चाहिये ॥
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