विषय · 13 श्लोक

भगवद् गीता में Awe

भगवद् गीता के 13 श्लोक जो awe पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।

चुने हुए 3 श्लोक — पूरा पाठ + संस्कृत ऑडियो
भगवद् गीता 11.14Speaker: Arjuna
ततः विस्मयाविष्टो हृष्टरोमा धनञ्जयः
प्रणम्य शिरसा देवं कृताञ्जलिरभाषत
अर्थ · हिन्दी
भगवान् के विश्वरूपको देखकर अर्जुन बहुत चकित हुए और आश्चर्यके कारण उनका शरीर रोमाञ्चित हो गया । वे हाथ जोड़कर विश्वरूप देवको मस्तकसे प्रणाम करके बोले ॥
सार
Arjuna is stunned by the cosmic form. He bows his head, joins his hands, and begins to speak.
A glimpse of the vast can turn shock into surrender.
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भगवद् गीता 11.16Speaker: Arjuna
अनेकबाहूदरवक्त्रनेत्रंपश्यामि त्वां सर्वतोऽनन्तरूपम्
नान्तं मध्यं पुनस्तवादिंपश्यामि विश्वेश्वर विश्वरूप
अर्थ · हिन्दी
हे विश्वरूप हे विश्वेश्वरव आपको मैं अनेक हाथों, पेटों, मुखों और नेत्रोंवाला तथा सब ओरसे अनन्त रूपोंवाला देख रहा हूँ । मैं आपके न आदिको, न मध्यको और न अन्तको ही देख रहा हूँ ॥
सार
Arjuna sees Krishna’s cosmic form as limitless, with countless arms, mouths, and eyes. He cannot find its beginning, middle, or end.
The largest reality has no edge the mind can grasp.
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भगवद् गीता 11.17Speaker: Arjuna
किरीटिनं गदिनं चक्रिणं चतेजोराशिं सर्वतोदीप्तिमन्तम्
पश्यामि त्वां दुर्निरीक्ष्यं समन्ताद्दीप्तानलार्कद्युतिमप्रमेयम्
अर्थ · हिन्दी
मैं आपको किरीट, गदा, चक्र तथा शङ्ख और पद्म धारण किये हुए देख रहा हूँ । आपको तेजकी राशि, सब ओर प्रकाश करनेवाले, देदीप्यमान अग्नि तथा सूर्यके समान कान्तिवाले, नेत्रोंके द्वारा कठिनतासे देखे जानेयोग्य और सब तरफसे अप्रमेयस्वरूप देख रहा हूँ ॥
सार
Arjuna sees Krishna in a radiant cosmic form, crowned and armed, blazing like fire and the sun, impossible to measure or fully look at.
What is most real cannot be fully held by sight.
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