विषय · 14 श्लोक
भगवद् गीता में Arjuna Vishada
भगवद् गीता के 14 श्लोक जो arjuna vishada पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।
- 1.28अर्जुन बोले हे कृष्ण युद्ध की इच्छावाले इस कुटुम्बसमुदाय को अपने सामने उपस्थित देखकर मेरे अङ्ग शिथिल हो रहे हैं और मुख सूख रहा है तथा मेरे
- 1.29अर्जुन बोले हे कृष्ण युद्ध की इच्छावाले इस कुटुम्बसमुदाय को अपने सामने उपस्थित देखकर मेरे अङ्ग शिथिल हो रहे हैं और मुख सूख रहा है तथा मेरे
- 1.31हे केशव मैं लक्षणों शकुनों को भी विपरीत देख रहा हूँ और युद्ध में स्वजनोंको मारकर श्रेय लाभ भी नहीं देख रहा हूँ ॥
- 1.32हे कृष्ण मैं न तो विजय चाहता हूँ, न राज्य चाहता हूँ और न सुखों को ही चाहता हूँ । हे गोविन्द हमलोगों को राज्य से क्या लाभ भोगों से क्या लाभ
- 1.33जिनके लिये हमारी राज्य, भोग और सुखकी इच्छा है, वे ही ये सब अपने प्राणों की और धन की आशा का त्याग करके युद्ध में खड़े हैं ॥
- 1.35आचार्य, पिता, पुत्र और उसी प्रकार पितामह, मामा, ससुर, पौत्र, साले तथा अन्य जितने भी सम्बन्धी हैं, मुझपर प्रहार करने पर भी मैं इनको मारना नही
- 1.37इसलिये अपने बान्धव इन धृतराष्ट्रसम्बन्धियों को मारने के लिये हम योग्य नहीं हैं क्योंकि हे माधव अपने कुटुम्बियों को मारकर हम कैसे सुखी होंगे
- 1.38यद्यपि लोभ के कारण जिनका विवेकविचार लुप्त हो गया है, ऐसे ये दुर्योधन आदि कुल का नाश करने से होनेवाले दोष को और मित्रों के साथ द्वेष करने से
- 1.42वर्णसंकर कुलघातियों को और कुल को नरक में ले जानेवाला ही होता है । श्राद्ध और तर्पण न मिलने से इन कुलघातियों के पितर भी अपने स्थान से गिर जा
- 1.44हे जनार्दन जिनके कुलधर्म नष्ट हो जाते हैं, उन मनुष्यों का बहुत काल तक नरकों में वापस होता है, ऐसा हम सुनते आये हैं ॥
- 1.45यह बड़े आश्चर्य और खेद की बात है कि हमलोग बड़ा भारी पाप करने का निश्चय कर बैठे हैं, जो कि राज्य और सुख के लोभ से अपने स्वजनों को मारने के लि
- 1.46अगर ये हाथों में शस्त्रअस्त्र लिये हुए धृतराष्ट्र के पक्षपाती लोग युद्धभूमि में सामना न करनेवाले तथा शस्त्ररहित मुझ को मार भी दें, तो वह मेर
- 2.7कायरतारूपदोषसे तिरस्कृत स्वभाववाला और धर्मके विषयमें मोहित अन्तःकरणवाला मैं आपसे पूछता हूँ कि जो निश्चित कल्याण करनेवाली हो, वह मेरे लिये कह
- 2.8पृथ्वीपर धनधान्यसमृद्ध और शत्रुरहितराज्य तथा स्वर्गमें देवताओंका आधिपत्य मिल जाय तो भी इन्द्रियोंको सुखानेवाला मेरा जो शोक है, वह दूर हो जाय