अर्जुन विषाद योग · श्लोक 35

भगवद् गीता 1.35

No prize can justify killing what is sacred to you.

एतान्न हन्तुमिच्छामि घ्नतोऽपि मधुसूदन । अपि त्रैलोक्यराज्यस्य हेतोः किं नु महीकृते ॥
हिन्दी अनुवाद
आचार्य, पिता, पुत्र और उसी प्रकार पितामह, मामा, ससुर, पौत्र, साले तथा अन्य जितने भी सम्बन्धी हैं, मुझपर प्रहार करने पर भी मैं इनको मारना नहीं चाहता, और हे मधुसूदन मुझे त्रिलोकी का राज्य मिलता हो, तो भी मैं इनको मारना नहीं चाहता, फिर पृथ्वीके लिये तो मैं इनको मारूँ ही क्या ॥
English
I do not want to kill these people, even if they kill me, O Madhusudana. Not even for the rule of the three worlds, much less for the earth.
विषय:kurukshetraarjuna-vishadakinship
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