कर्म संन्यास योग · श्लोक 9

भगवद् गीता 5.9

Action happens; ownership is the illusion.

प्रलपन्विसृजन्गृह्णन्नुन्मिषन्निमिषन्नपि । इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेषु वर्तन्त इति धारयन् ॥
हिन्दी अनुवाद
तत्त्वको जाननेवाला सांख्ययोगी देखता, सुनता, छूता, सूँघता, खाता, चलता, ग्रहण करता, बोलता, मलमूत्र का त्याग करता, सोता हुआ, श्वास लेता तथा आँखें खोलता और मूँदता हुआ भी सम्पूर्ण इन्द्रियाँ इन्द्रियोंके विषयोंमें बरत रही हैं ऐसा समझकर मैं स्वयं कुछ भी नहीं करता हूँ ऐसा माने ॥
English
Even while speaking, releasing, taking, opening, and closing the eyes, the wise know: the senses move among their objects.
विषय:indriyasense-objectskartṛtva
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