विषय · 10 श्लोक

भगवद् गीता में Karma Phala

भगवद् गीता के 10 श्लोक जो karma phala पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।

चुने हुए 3 श्लोक — पूरा पाठ + संस्कृत ऑडियो
भगवद् गीता 2.51Speaker: Krishna
कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिणः
जन्मबन्धविनिर्मुक्ताः पदं गच्छन्त्यनामयम्
अर्थ · हिन्दी
समतायुक्त मनीषी साधक कर्मजन्य फलका त्याग करके जन्मरूप बन्धनसे मुक्त होकर निर्विकार पदको प्राप्त हो जाते हैं ॥
सार
Wise people let go of the results of their actions. That freedom breaks the chain that keeps them bound to repeated birth and suffering.
Freedom comes when action is done without clutching its reward.
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भगवद् गीता 4.14Speaker: Krishna
मां कर्माणि लिम्पन्ति मे कर्मफले स्पृहा
इति मां योऽभिजानाति कर्मभिर्न बध्यते
अर्थ · हिन्दी
मेरे द्वारा गुणों और कर्मोंके विभागपूर्वक चारों वर्णोंकी रचना की गयी है । उससृष्टिरचना आदि का कर्ता होनेपर भी मुझ अव्यय परमेश्वरको तू अकर्ता जान । कारण कि कर्मोंके फलमें मेरी स्पृहा नहीं है, इसलिये मुझे कर्म लिप्त नहीं करते । इस प्रकार जो मुझे तत्त्वसे जान लेता है, वह भी कर्मोंसे नहीं बँधता ॥
सार
Actions do not affect Krishna, because he has no desire for their results. Anyone who understands this deeply is also freed from being bound by action.
Knowing the action is not yours to possess breaks its grip.
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भगवद् गीता 4.20Speaker: Krishna
त्यक्त्वा कर्मफलासङ्गं नित्यतृप्तो निराश्रयः
कर्मण्यभिप्रवृत्तोऽपि नैव किञ्चित्करोति सः
अर्थ · हिन्दी
जो कर्म और फलकी आसक्तिका त्याग करके आश्रयसे रहित और सदा तृप्त है, वह कर्मोंमें अच्छी तरह लगा हुआ भी वास्तवमें कुछ भी नहीं करता ॥
सार
A person can stay fully active and still be inwardly free by dropping attachment to results and resting in inner contentment.
Action loses its grip when nothing in you waits to possess its fruit.
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