विषय · 14 श्लोक
भगवद् गीता में Discipline
भगवद् गीता के 14 श्लोक जो discipline पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।
- 3.3श्रीभगवान् बोले हे निष्पाप अर्जुन इस मनुष्यलोकमें दो प्रकारसे होनेवाली निष्ठा मेरे द्वारा पहले कही गयी है । उनमें ज्ञानियोंकी निष्ठा ज्ञान
- 3.32परन्तु जो मनुष्य मेरे इस मतमें दोषदृष्टि करते हुए इसका अनुष्ठान नहीं करते, उन सम्पूर्ण ज्ञानोंमें मोहित और अविवेकी मनुष्योंको नष्ट हुए ही सम
- 4.26अन्य योगीलोग श्रोत्रादि समस्त इन्द्रियोंका संयमरूप अग्नियोंमें हवन किया करते हैं और दूसरे योगीलोग शब्दादि विषयोंका इन्द्रियरूप अग्नियोंमें ह
- 4.28दूसरे कितने ही तीक्ष्ण व्रत करनेवाले प्रयत्नशील साधक द्रव्यसम्बन्धी यज्ञ करनेवाले हैं, और कितने ही तपोयज्ञ करनेवाले हैं, और दूसरे कितने ही य
- 5.6परन्तु हे महाबाहो कर्मयोगके बिना संन्यास सिद्ध होना कठिन है । मननशील कर्मयोगी शीघ्र ही ब्रह्मको प्राप्त हो जाता है ॥
- 6.5अपने द्वारा अपना उद्धार करे, अपना पतन न करे क्योंकि आप ही अपना मित्र है और आप ही अपना शत्रु है ॥
- 6.16हे अर्जुन यह योग न तो अधिक खानेवालेका और न बिलकुल न खानेवालेका तथा न अधिक सोनेवालेका और न बिलकुल न सोनेवालेका ही सिद्ध होता है ॥
- 6.17दुःखोंका नाश करनेवाला योग तो यथायोग्य आहार और विहार करनेवालेका, कर्मोंमें यथायोग्य चेष्टा करनेवालेका तथा यथायोग्य सोने और जागनेवालेका ही सिद
- 6.46सकामभाववाले तपस्वियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है, ज्ञानियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है और कर्मियोंसे भी योगी श्रेष्ठ है ऐसा मेरा मत है । अतः हे अर्जुन
- 16.23जो मनुष्य शास्त्रविधिको छोड़कर अपनी इच्छासे मनमाना आचरण करता है, वह न सिद्धिअन्तःकरणकी शुद्धि को, न सुखको और न परमगतिको ही प्राप्त होता है ॥
- 17.5जो मनुष्य शास्त्रविधिसे रहित घोर तप करते हैं जो दम्भ और अहङ्कारसे अच्छी तरह युक्त हैं जो भोगपदार्थ, आसक्ति और हठसे युक्त हैं जो शरीरमें स्थि
- 17.6जो मनुष्य शास्त्रविधिसे रहित घोर तप करते हैं जो दम्भ और अहङ्कारसे अच्छी तरह युक्त हैं जो भोगपदार्थ, आसक्ति और हठसे युक्त हैं जो शरीरमें स्थि
- 17.19जो तप मूढ़तापूर्वक हठसे अपनेको पीड़ा देकर अथवा दूसरोंको कष्ट देनेके लिये किया जाता है, वह तप तामस कहा गया है ॥
- 18.34हे पृथानन्दन अर्जुन फलकी इच्छावाला मनुष्य जिस धृतिके द्वारा धर्म, काम भोग और अर्थको अत्यन्त आसक्तिपूर्वक धारण करता है, वह धृति राजसी है ॥