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विषय · 11 श्लोक

भगवद् गीता में कृष्ण का उपदेश

ये श्लोक कृष्ण के उपदेश के मुख्य कथन हैं, अध्याय 2 की अविनाशी आत्मा से लेकर अध्याय 18 में आसक्ति के त्याग तक।

गीता के 11 श्लोक जो कृष्ण का उपदेश पर हैं, सभी अध्यायों से, क्रम में।

चुने हुए 3 श्लोक: पूरा पाठ और संस्कृत ऑडियो
भगवद् गीता 2.20
न जायते म्रियते वा कदाचिन्नायं भूत्वा भविता वा न भूयः ।
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणोन हन्यते हन्यमाने शरीरे ॥
हिन्दी अर्थ
यह शरीरी न कभी जन्मता है और न मरता है तथा यह उत्पन्न होकर फिर होनेवाला नहीं है । यह जन्मरहित, नित्यनिरन्तर रहनेवाला, शाश्वत और पुराण अनादि है । शरीरके मारे जानेपर भी यह नहीं मारा जाता ॥
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भगवद् गीता 2.22
वासांसि जीर्णानि यथा विहायनवानि गृह्णाति नरोऽपराणि ।
तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्यन्यानि संयाति नवानि देही ॥
हिन्दी अर्थ
मनुष्य जैसे पुराने कपड़ोंको छोड़कर दूसरे नये कपड़े धारण कर लेता है, ऐसे ही देही पुराने शरीरोंको छोड़कर दूसरे नये शरीरोंमें चला जाता है ॥
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भगवद् गीता 2.30
देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत ।
तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि ॥
हिन्दी अर्थ
हे भरतवंशोद्भव अर्जुन सबके देहमें यह देही नित्य ही अवध्य है । इसलिये सम्पूर्ण प्राणियोंके लिये अर्थात् किसी भी प्राणीके लिये तुम्हें शोक नहीं करना चाहिये ॥
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