विषय · 11 श्लोक

भगवद् गीता में Krishna Teaching

भगवद् गीता के 11 श्लोक जो krishna teaching पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।

चुने हुए 3 श्लोक — पूरा पाठ + संस्कृत ऑडियो
भगवद् गीता 2.20Speaker: Krishna
जायते म्रियते वा कदाचिन्नायं भूत्वा भविता वा भूयः
अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणोन हन्यते हन्यमाने शरीरे
अर्थ · हिन्दी
यह शरीरी न कभी जन्मता है और न मरता है तथा यह उत्पन्न होकर फिर होनेवाला नहीं है । यह जन्मरहित, नित्यनिरन्तर रहनेवाला, शाश्वत और पुराण अनादि है । शरीरके मारे जानेपर भी यह नहीं मारा जाता ॥
सार
The true self is never born and never dies. It does not begin with the body, and it is not destroyed when the body ends.
What you are cannot be touched by birth or death.
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भगवद् गीता 2.22Speaker: Krishna
वासांसि जीर्णानि यथा विहायनवानि गृह्णाति नरोऽपराणि
तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्यन्यानि संयाति नवानि देही
अर्थ · हिन्दी
मनुष्य जैसे पुराने कपड़ोंको छोड़कर दूसरे नये कपड़े धारण कर लेता है, ऐसे ही देही पुराने शरीरोंको छोड़कर दूसरे नये शरीरोंमें चला जाता है ॥
सार
The true self passes from one body to another the way a person changes clothes.
What you are does not end when one body is left behind.
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भगवद् गीता 2.30Speaker: Krishna
देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत
तस्मात्सर्वाणि भूतानि त्वं शोचितुमर्हसि
अर्थ · हिन्दी
हे भरतवंशोद्भव अर्जुन सबके देहमें यह देही नित्य ही अवध्य है । इसलिये सम्पूर्ण प्राणियोंके लिये अर्थात् किसी भी प्राणीके लिये तुम्हें शोक नहीं करना चाहिये ॥
सार
The true self in every body cannot be destroyed, so there is no reason to grieve for anyone.
What is most real in a person cannot be killed, so grief loses its ground.
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