विषय · 10 श्लोक

भगवद् गीता में Grief

भगवद् गीता के 10 श्लोक जो grief पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।

चुने हुए 3 श्लोक — पूरा पाठ + संस्कृत ऑडियो
भगवद् गीता 1.26Speaker: Sanjaya
तत्रापश्यत्स्थितान्पार्थः पितृ़नथ पितामहान्
आचार्यान्मातुलान्भ्रातृ़न्पुत्रान्पौत्रान्सखींस्तथा
अर्थ · हिन्दी
उसके बाद पृथानन्दन अर्जुनने उन दोनों ही सेनाओंमें स्थित पिताओंको, पितामहोंको, आचार्योंको, मामाओंको, भाइयोंको, पुत्रोंको, पौत्रोंको तथा मित्रोंको, ससुरोंको और सुहृदोंको भी देखा ॥
सार
Arjuna looks across the battlefield and recognizes his own relatives and teachers among the enemy ranks.
Recognition turns battle into sorrow.
पूरा श्लोक + ऑडियो पढ़ें →
भगवद् गीता 2.1Speaker: Sanjaya
सञ्जय उवाचतं तथा कृपयाऽविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम्
विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः
अर्थ · हिन्दी
संजय बोले वैसी कायरता से आविष्ट उन अर्जुन के प्रति, जो कि विषाद कर रहे हैं और आँसुओं के कारण जिनके नेत्रों की देखने की शक्ति अवरुद्ध हो रही है, भगवान् मधुसूदन ये आगे कहे जानेवाले वचन बोले ॥
सार
Sanjaya describes Arjuna in tears and grief as Krishna begins to speak to him.
Grief opens the door for instruction.
पूरा श्लोक + ऑडियो पढ़ें →
भगवद् गीता 2.8Speaker: Arjuna
हि प्रपश्यामि ममापनुद्याद्यच्छोकमुच्छोषणमिन्द्रियाणाम्
अवाप्य भूमावसपत्नमृद्धम्राज्यं सुराणामपि चाधिपत्यम्
अर्थ · हिन्दी
पृथ्वीपर धनधान्यसमृद्ध और शत्रुरहितराज्य तथा स्वर्गमें देवताओंका आधिपत्य मिल जाय तो भी इन्द्रियोंको सुखानेवाला मेरा जो शोक है, वह दूर हो जाय ऐसा मैं नहीं देखता हूँ ॥
सार
Arjuna says that even the greatest possible power and wealth would not remove his grief. His mind is so overwhelmed that nothing outside can fix it.
No outer victory can cure an inner collapse.
पूरा श्लोक + ऑडियो पढ़ें →
सभी 10 श्लोक