विषय · 13 श्लोक

भगवद् गीता में Duty

भगवद् गीता के 13 श्लोक जो duty पर हैं — सभी अध्यायों से, क्रम में।

चुने हुए 3 श्लोक — पूरा पाठ + संस्कृत ऑडियो
भगवद् गीता 2.3Speaker: Krishna
क्लैब्यं मा स्म गमः पार्थ नैतत्त्वय्युपपद्यते
क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप
अर्थ · हिन्दी
हे पृथानन्दन अर्जुन इस नपुंसकताको मत प्राप्त हो क्योंकि तुम्हारेमें यह उचित नहीं है । हे परंतप हृदयकी इस तुच्छ दुर्बलताका त्याग करके युद्धके लिये खड़े हो जाओ ॥
सार
Krishna tells Arjuna not to sink into weakness. He must drop this small-hearted fear and stand up to fight.
Weakness is optional; the call to act remains.
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भगवद् गीता 2.47Speaker: Krishna
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि
अर्थ · हिन्दी
कर्तव्यकर्म करनेमें ही तेरा अधिकार है, फलोंमें कभी नहीं । अतः तू कर्मफलका हेतु भी मत बन और तेरी अकर्मण्यतामें भी आसक्ति न हो ॥
सार
You control your action, not what it produces. Do your duty without chasing the reward or getting attached to doing nothing.
Action belongs to you; the result does not.
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भगवद् गीता 3.8Speaker: Krishna
नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः
शरीरयात्रापि ते प्रसिद्ध्येदकर्मणः
अर्थ · हिन्दी
तू शास्त्रविधिसे नियत किये हुए कर्तव्यकर्म कर क्योंकि कर्म न करनेकी अपेक्षा कर्म करना श्रेष्ठ है तथा कर्म न करनेसे तेरा शरीरनिर्वाह भी सिद्ध नहीं होगा ॥
सार
Krishna tells Arjuna to do the duty assigned to him. Action is better than sitting idle, and even basic life cannot continue through inaction.
Right action is unavoidable; even survival depends on it.
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